




Inkhabar Haryana, IND Vs AUS: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रही टेस्ट सीरीज़ का तीसरा मुकाबला रोमांचक मोड़ पर है। चौथे दिन का खेल कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा। भारतीय टीम, जिसने पहली पारी में बल्लेबाजी में संघर्ष किया, अब फॉलो-ऑन से बचने के लिए 246 रनों का लक्ष्य हासिल करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, बारिश ने खेल में बाधा डाल दी है, लेकिन इसने भारतीय टीम को रणनीति बनाने का समय भी दिया है।
फॉलो-ऑन लंबे प्रारूप वाले क्रिकेट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य मैच को एक निर्णायक स्थिति में पहुंचाना होता है। जब कोई टीम अपनी पहली पारी में विपक्षी टीम के स्कोर से काफी पीछे रह जाती है, तो विपक्षी कप्तान उस टीम को दोबारा बल्लेबाजी करने के लिए मजबूर कर सकता है। इससे मैच का परिणाम जल्दी निकाला जा सकता है।
क्रिकेट के नियमों के अनुसार, फॉलो-ऑन लागू करने का फैसला कप्तान लेता है और यह निर्णय लेने के बाद इसे बदला नहीं जा सकता। फॉलो-ऑन लागू करने के लिए विपक्षी टीम की पहली पारी का स्कोर पहली बल्लेबाजी करने वाली टीम के स्कोर से तय अंतर से कम होना चाहिए।
मैच के प्रारूप और दिनों की संख्या के आधार पर फॉलो-ऑन के लिए न्यूनतम लीड अलग-अलग होती है:
यदि बारिश या अन्य कारणों से पहले दिन खेल प्रभावित होता है, तो यह लीड समायोजित की जा सकती है।
भारत वर्तमान में फॉलो-ऑन से बचने के लिए संघर्ष कर रहा है। हालांकि, चौथे दिन के खेल में बारिश ने बार-बार व्यवधान डाला है, जिससे भारतीय बल्लेबाजों को कुछ राहत मिली है। अब सवाल यह है कि क्या ऑस्ट्रेलिया इस स्थिति में फॉलो-ऑन लागू करेगा।
ऑस्ट्रेलिया ने पिछली बार भारत पर फॉलो-ऑन 2001 में ईडन गार्डन्स में लागू किया था। हालांकि, वह मैच भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे यादगार पल बन गया, जहां राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की ऐतिहासिक साझेदारी ने भारत को जीत दिलाई। लेकिन हाल के समय में फॉलो-ऑन की रणनीति का इस्तेमाल कम हो गया है। कप्तान अक्सर अपने गेंदबाजों को आराम देने और दूसरी पारी में बड़ा स्कोर खड़ा कर मैच पर अपनी पकड़ मजबूत करने का विकल्प चुनते हैं।
भारतीय टीम के लिए इस समय फॉलो-ऑन से बचना और मैच को ड्रॉ की तरफ ले जाना प्राथमिक लक्ष्य होगा। ब्रिसबेन की परिस्थितियों और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की लय को देखते हुए यह आसान नहीं होगा। भारतीय बल्लेबाजों को न सिर्फ धैर्य दिखाना होगा, बल्कि साझेदारी बनाकर स्कोरबोर्ड को भी आगे बढ़ाना होगा।




