




1993 में सिरसा की जनता, हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार के सहयोग से निर्माण शुरू हुआ चौ. दलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम 1996 में उद्घाटन के बाद हरियाणा के सबसे बड़े इंडोर स्टेडियमों में से एक के रूप में उभरा। यहां कुश्ती, जिम्नास्टिक, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और अन्य कई इंडोर खेलों के आयोजन होते रहे हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की भी मेजबानी की गई है।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों से स्टेडियम की स्थिति लगातार खराब हो रही है। सफाई की कमी, खेल उपकरणों का रख-रखाव न होना और खेल मैदानों का वीरान हो जाना जैसे मुद्दों ने इसे खिलाड़ियों के लिए अनुपयोगी बना दिया है।
कुमारी सैलजा ने पत्र में स्टेडियम की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि खेल विभाग की अनदेखी के कारण यह स्टेडियम आज खिलाड़ियों के अभ्यास और प्रतियोगिताओं के आयोजन के योग्य नहीं रह गया है। उन्होंने केंद्रीय खेल मंत्री से आग्रह किया है कि संबंधित अधिकारियों को स्टेडियम के रख-रखाव और सुविधाओं में सुधार के निर्देश दिए जाएं।
चौ. दलबीर सिंह स्टेडियम की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण खेल उपकरणों की सही देखभाल न होना है। आधुनिक और उन्नत उपकरण, जो खिलाड़ियों को उनके खेल में बेहतर प्रदर्शन के लिए उपलब्ध कराए गए थे, आज धूल फांक रहे हैं। खेल मैदान वीरान पड़े हैं, जबकि सफाई की स्थिति इतनी खराब है कि यहां अभ्यास करना भी मुश्किल हो गया है।
सैलजा ने बताया कि हैंडबॉल और बास्केटबॉल के कोर्ट भी अब नाममात्र के रह गए हैं। स्टेडियम मंडी से सटा होने के कारण दिनभर धूल भरी हवा चलती रहती है, जिससे खिलाड़ियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं।
खेल विभाग की निष्क्रियता ने न केवल स्टेडियम की स्थिति को बिगाड़ा है, बल्कि स्थानीय खेल संस्कृति पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला है। कभी खिलाड़ियों से गुलजार रहने वाला यह स्टेडियम अब वीरान हो चुका है। खिलाड़ियों की संख्या दिन-ब-दिन कम हो रही है, जिससे युवाओं में खेलों के प्रति रुचि घटती जा रही है।




