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Manu Bhaker: “ओलंपिक में दो पदक जीतने के बाद भी सम्मान नहीं”, मनु भाकर के पिता ने खेल पुरस्कार चयन पर उठाए गंभीर सवाल

BY: • LAST UPDATED : December 24, 2024
Inkhabar Haryana, Manu Bhaker: भारत में खेलों का भविष्य बेहतर और उज्ज्वल बनाने के लिए खिलाड़ियों के प्रदर्शन और योगदान का सम्मान आवश्यक है। इसी कड़ी में हर साल मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार जैसे सम्मान प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को दिया जाता है। हालांकि, इस वर्ष ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर का नाम इस सूची से गायब होने पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

ओलंपिक में ऐतिहासिक प्रदर्शन

मनु भाकर ने टोक्यो ओलंपिक 2024 में 10 मीटर एयर पिस्टल व्यक्तिगत और 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे स्वतंत्र भारत की पहली महिला एथलीट बनीं, जिन्होंने एक ही ओलंपिक संस्करण में दो पदक जीते। उनके इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने भारत को गर्व का क्षण दिया।

लेकिन, उनकी इस उपलब्धि के बावजूद, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार की सूची में उनका नाम नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।

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मनु भाकर की प्रतिक्रिया

नामांकन सूची में अपना नाम न देखकर मनु भाकर ने अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने मीडिया से कहा कि मुझे लगता है कि मैं इस पुरस्कार की हकदार हूं। यह फैसला देश पर छोड़ देना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी खेल पुरस्कार चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाती है।

पारिवारिक निराशा और असंतोष

मनु के पिता राम किशन ने अपनी बेटी के नाम को पुरस्कार सूची में न देखकर गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में दो पदक जीतने के बाद भी सम्मान नहीं। मनु ने मुझसे कहा कि शायद मुझे ओलंपिक में नहीं जाना चाहिए था और देश के लिए पदक नहीं जीतना चाहिए था।

राम किशन ने आगे कहा कि मनु का प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास में मील का पत्थर है। उन्होंने सरकार और चयन समिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर हमें भारत को खेलों का केंद्र बनाना है, तो ओलंपिक पदक विजेताओं को उचित सम्मान देना होगा।”

चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल

राम किशन ने इस बात पर भी संदेह जताया कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि चयन समिति पर किसी विशेष प्रकार का दबाव था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इतना शानदार प्रदर्शन भी पुरस्कार के लिए पर्याप्त नहीं है, तो देश के खिलाड़ियों को प्रेरणा कहां से मिलेगी।