




मनु भाकर ने टोक्यो ओलंपिक 2024 में 10 मीटर एयर पिस्टल व्यक्तिगत और 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे स्वतंत्र भारत की पहली महिला एथलीट बनीं, जिन्होंने एक ही ओलंपिक संस्करण में दो पदक जीते। उनके इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने भारत को गर्व का क्षण दिया।
लेकिन, उनकी इस उपलब्धि के बावजूद, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार की सूची में उनका नाम नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
नामांकन सूची में अपना नाम न देखकर मनु भाकर ने अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने मीडिया से कहा कि मुझे लगता है कि मैं इस पुरस्कार की हकदार हूं। यह फैसला देश पर छोड़ देना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी खेल पुरस्कार चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाती है।
मनु के पिता राम किशन ने अपनी बेटी के नाम को पुरस्कार सूची में न देखकर गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में दो पदक जीतने के बाद भी सम्मान नहीं। मनु ने मुझसे कहा कि शायद मुझे ओलंपिक में नहीं जाना चाहिए था और देश के लिए पदक नहीं जीतना चाहिए था।
राम किशन ने आगे कहा कि मनु का प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास में मील का पत्थर है। उन्होंने सरकार और चयन समिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर हमें भारत को खेलों का केंद्र बनाना है, तो ओलंपिक पदक विजेताओं को उचित सम्मान देना होगा।”
राम किशन ने इस बात पर भी संदेह जताया कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि चयन समिति पर किसी विशेष प्रकार का दबाव था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इतना शानदार प्रदर्शन भी पुरस्कार के लिए पर्याप्त नहीं है, तो देश के खिलाड़ियों को प्रेरणा कहां से मिलेगी।




