Inkhabar Haryana, ParaOlympic player Dharamveer: पैरा ओलंपिक खिलाड़ी धर्मवीर, जो हरियाणा के सोनीपत से ताल्लुक रखते हैं, को इस वर्ष अर्जुन अवार्ड के लिए चुना गया है। यह सम्मान उनकी कड़ी मेहनत और देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण है। हालांकि, धर्मवीर की खुशी अधूरी है, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि इस सम्मान के साथ सरकारी नौकरी का अवसर भी मिलेगा। धर्मवीर का कहना है कि अगर सरकारी नौकरी भी दी जाती, तो खुशी दोगुनी हो जाती।
नौकरी का इंतजार
धर्मवीर ने 2018 के एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था। उन्होंने कहा कि उसी प्रतियोगिता में मेडल जीतने वाले कुछ खिलाड़ियों को क्लास वन की नौकरी दी गई थी, लेकिन उन्हें यह अवसर नहीं मिला। धर्मवीर ने सरकार और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया कि किन आधारों पर नौकरी का चयन हुआ।
उन्होंने आगे बताया कि यह मामला उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने भी उठाया है। मुख्यमंत्री ने 10 जनवरी को अधिकारियों के साथ बैठक कर उचित समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
अर्जुन अवार्ड से खुशी, लेकिन खेल रत्न न मिलने का दर्द
धर्मवीर ने अर्जुन अवार्ड के लिए चुने जाने पर खुशी जाहिर की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें खेल रत्न अवार्ड मिलेगा। उन्होंने बताया कि 2018 में एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाले कई खिलाड़ियों को सीधे खेल रत्न दिया गया था। इसके बावजूद धर्मवीर और अन्य पैरा खिलाड़ियों को इससे वंचित रखा गया।
न्यायिक लड़ाई और सरकारी रवैया
धर्मवीर ने अपनी स्थिति सुधारने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्हें जीत भी मिली। इसके बावजूद, सरकार ने अभी तक उन्हें नौकरी देने का कोई निर्णय नहीं लिया है। धर्मवीर ने कहा कि नौकरी न मिलने से उन्हें न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक संघर्ष का भी सामना करना पड़ रहा है।
पैरा खिलाड़ियों के साथ भेदभाव का सवाल
धर्मवीर ने कहा कि एक खिलाड़ी का सपना होता है देश के लिए मेडल जीतना और अर्जुन या खेल रत्न जैसे बड़े सम्मान पाना। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि पैरा खिलाड़ियों को अक्सर मुख्यधारा के खिलाड़ियों से अलग मानकर उनके साथ भेदभाव किया जाता है।