Inkhabar Haryana, Acid Attack Survior Student Top in 12th Board: हौसले अगर बुलंद हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनी हैं चंडीगढ़ की रहने वाली काफ़ी, जिन्होंने न सिर्फ़ अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर का सामना मजबूती से किया, बल्कि अपनी मेहनत और लगन से एक मिसाल कायम कर दी। महज तीन साल की उम्र में एसिड अटैक की शिकार हुई काफ़ी ने अपनी आंखें खो दीं और चेहरा झुलस गया, लेकिन उनके सपनों ने कभी दम नहीं तोड़ा।
तीन साल की उम्र में जिंदगी का सबसे बड़ा ज़ख्म
साल 2011 में, जब काफ़ी सिर्फ तीन साल की थीं, उनके पड़ोसियों ने उन पर एसिड से हमला कर दिया। इस भयावह हमले ने उनकी दोनों आंखें छीन लीं और उनका चेहरा बुरी तरह झुलस गया। उस उम्र में जहां बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, काफ़ी को अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े। उनके माता-पिता के लिए ये समय बेहद कठिन था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। काफ़ी के पिता हरियाणा सिविल सचिवालय में कार्यरत हैं और मां एक गृहिणी हैं। उन्होंने अपनी बेटी के बेहतर इलाज के लिए दिल्ली में लगातार प्रयास किए और उसकी पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ शिफ्ट हो गए। यहां सेक्टर 26 स्थित ब्लाइंड स्कूल में काफ़ी ने दाखिला लिया और यहीं से उन्होंने अपने नए जीवन की शुरुआत की।
स्कूल में किया टॉप
अपने शारीरिक कष्टों के बावजूद काफ़ी का हौसला कभी डगमगाया नहीं। उन्होंने 10वीं की परीक्षा में स्कूल टॉप किया और अब 12वीं की परीक्षा में 95.6% अंक प्राप्त कर पूरे स्कूल में अव्वल स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि सिर्फ़ अंक नहीं हैं, बल्कि उनके आत्मविश्वास, मेहनत और संकल्प का प्रमाण हैं।
IAS बनने का सपना
काफ़ी का सपना अब और भी बड़ा है। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना चाहती हैं। उनका कहना है कि मैं देश की सेवा करना चाहती हूँ, ताकि मैं उन लोगों के लिए आवाज़ बन सकूं, जो समाज में शोषण या अन्याय का शिकार होते हैं। मुझे ज़िंदगी से कोई शिकवा नहीं है, जो मिला है, वो मंज़ूर है।