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Agni Tapasya in Kurukshetra: कुरुक्षेत्र  में आस्था की आग में तपता एक संन्यासी, 41 दिन तक बाबा राजेंद्र करेंगे अग्नि तपस्या

BY: • LAST UPDATED : June 5, 2025
Inkhabar Haryana, Agni Tapasya in Kurukshetra: हरियाणा के ऐतिहासिक और धर्मनगरी के रूप में विख्यात कुरुक्षेत्र में एक बार फिर अध्यात्म और आस्था का अलौकिक संगम देखने को मिल रहा है। कुरुक्षेत्र के गांव बिजड़पुर स्थित माता दुर्गा लाडो रानी दरबार के गद्दीनशीन और जूना अखाड़ा से जुड़े तपस्वी बाबा राजेंद्र राठी ने भीषण गर्मी के बीच 41 दिनों की अग्नि तपस्या आरंभ कर दी है। उनका यह कठिन व्रत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पड़ोसी राष्ट्र की नापाक मानसिकता के खिलाफ आध्यात्मिक प्रतिकार का प्रतीक माना जा रहा है।

आस्था और तप का अद्भुत संगम

बाबा राजेंद्र राठी का यह अनुष्ठान कोई सामान्य संकल्प नहीं, बल्कि एक ज्वलंत संदेश है कि जब देश, धर्म और संस्कृति पर संकट मंडराते हैं, तब संत-समाज अग्नि के बीच बैठकर भी रक्षा का संकल्प लेता है। बाबा प्रतिवर्ष गर्मी के दो महीनों में, बिना किसी भौतिक सुख-सुविधा के, उपलों की धूनी के बीच तपस्या करते हैं। यह उनका लगातार दो दशकों से जारी तप है जो इस बार खासतौर पर राष्ट्र की अखंडता और सनातन धर्म की रक्षा को समर्पित है।

क्या हैं तपस्या का उद्देश्य?

बाबा राजेंद्र का स्पष्ट मानना है कि सनातन धर्म को यदि बल चाहिए तो वह अध्यात्म और आस्था से ही मिलेगा। उनका कहना है कि आज जब विश्व में सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों पर चोट हो रही है, ऐसे में धर्मस्थ साधकों की भूमिका और भी ज़रूरी हो जाती है।

इस वर्ष की तपस्या को उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” के प्रति जवाबी आध्यात्मिक प्रतिरोध बताया है। यह उस सोच के विरुद्ध तप है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और उसकी जड़ें कमजोर करना चाहती है। बाबा का उद्देश्य है कि देशवासी जागरूक हों, राष्ट्रधर्म को समझें और धर्म के साथ राष्ट्र की उन्नति में सहभागी बनें।

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अग्नि की धूनी में कठोर साधना

साधारण तापमान में भी जहां लोग घर से बाहर निकलने से कतराते हैं, वहीं बाबा राजेंद्र 45 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक तापमान में जलती धूनी के बीच निर्विकार भाव से बैठे हैं। उपलों की जलती लपटें, धुएं की तपिश और लू के थपेड़ों के बीच यह तप एक साधक की आत्मशक्ति और संकल्प का परिचायक है।