




यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों ने गहराई पकड़ ली थी। खट्टर सरकार के कार्यकाल में आरटीए (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) के पदों पर गैर-एचसीएस (हरियाणा सिविल सेवा) अधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय लिया गया था। उस समय वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शत्रुजीत कपूर ने इस कदम को लागू किया था। यह बदलाव तब आवश्यक समझा गया जब कई एचसीएस अधिकारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार किया गया।
अनिल विज का कहना है कि सिविल और पुलिस अधिकारियों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां अलग-अलग होती हैं। पुलिस अधिकारियों को सिविल पदों पर तैनात करना न केवल सिस्टम को जटिल बनाता है, बल्कि भ्रष्टाचार और अक्षमता की संभावना को भी बढ़ाता है। उन्होंने इस संबंध में पत्र लिखकर अपनी असहमति जाहिर की थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
वर्तमान परिवहन मंत्री बनने के बाद विज ने विभागीय सुधारों की प्रक्रिया शुरू की। मोटर व्हीकल ऑफिसर के रूप में तैनात पुलिस अधिकारियों को वापस बुला लिया गया है और उनके स्थान पर विभागीय कर्मियों की नियुक्ति की जा रही है। इसके अतिरिक्त, आरटीए के पदों पर एचसीएस अधिकारियों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है।
परिवहन विभाग के प्रधान सचिव, आईपीएस नवदीप सिंह विर्क, को खेल विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया है। उनकी जगह वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के रूप में नियुक्त किया गया है। अशोक खेमका की छवि एक ईमानदार और सुधारवादी अधिकारी की है और उनके इस पद पर आने से विभाग में पारदर्शिता और सुधार की उम्मीदें बढ़ गई हैं।




