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Ayushman Bharat scheme: हरियाणा में आयुष्मान योजना ठप, आज से निजी अस्पतालों ने बंद किया इलाज

BY: • LAST UPDATED : August 7, 2025

Inkhabar Haryana, Ayushman Bharat scheme: हरियाणा में गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और राज्य सरकार की चिरायु योजना गंभीर संकट में आ गई है। प्रदेश के 650 से अधिक निजी अस्पताल, जो इन योजनाओं के तहत करीब 90% लाभार्थियों को इलाज मुहैया कराते हैं, ने 7 अगस्त 2025 से इन योजनाओं के तहत इलाज देना बंद कर दिया है।

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कैसे शुरू हुआ विवाद?

इस पूरे मुद्दे की पृष्ठभूमि मार्च 2025 से शुरू होती है, जब से सरकार ने निजी अस्पतालों को केवल 10–15% बकाया भुगतान ही किया है। इन अस्पतालों ने महीनों तक सरकारी सिस्टम में भरोसा बनाए रखा, लेकिन जब हालात बेकाबू होने लगे और छोटे अस्पतालों की वित्तीय रीढ़ टूटने लगी, तब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), हरियाणा ने कड़ा फैसला लिया।

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क्या हैं IMA का आरोप?

IMA हरियाणा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय महाजन ने सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि सरकार डॉक्टरों की जेब से मुफ्त इलाज करवा कर वाहवाही लूटना चाहती है। रुपये डॉक्टरों के लगें और तालियाँ सरकार को मिलें ये अब नहीं चलेगा।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल के साथ हाल ही में बैठक हुई, लेकिन वहां भी कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। राजपाल यह स्पष्ट नहीं कर सके कि कब और कितना बजट जारी किया जाएगा। उनका कहना था कि 22 अगस्त से शुरू होने वाले मानसून सत्र में पूरक बजट की मांग की जाएगी, जिसका सीधा मतलब है भुगतान में अब भी कम से कम एक महीने की और देरी तय है।

कितनी गंभीर है वित्तीय स्थिति?

IMA के मुताबिक, हरियाणा में लगभग 650–700 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत और चिरायु योजना से जुड़े हुए हैं। ये अस्पताल राज्य के 90% आयुष्मान मरीजों का इलाज करते हैं। लेकिन मार्च 2025 से अब तक, सरकार ने केवल 10–15% बकाया भुगतान किया है। 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान सरकार के पास लंबित है। सरकार ने 2024–25 के लिए केवल 700 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया, जबकि जरूरत 2,000–2,500 करोड़ रुपये की है। पिछले दो वर्षों से भुगतान की प्रक्रिया लगातार अनियमित रही है, जिससे विशेषकर छोटे अस्पतालों के संचालन पर संकट खड़ा हो गया है।

मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित

इस निर्णय से सबसे अधिक असर उन मरीजों पर पड़ रहा है जो पूरी तरह से आयुष्मान योजना पर निर्भर हैं। गरीब वर्ग, जिनके लिए यह योजना एकमात्र स्वास्थ्य सुरक्षा थी, अब इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं जहां पहले से ही सुविधाएं सीमित और बोझ अधिक है।

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