




सफाई कर्मचारियों का कहना है कि पिछले तीन महीनों से वेतन न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। वे दैनिक जरूरतें पूरी करने, घर का किराया चुकाने, और बच्चों की स्कूल फीस भरने में असमर्थ हैं। उनका आरोप है कि ठेकेदार हर बार तीन महीने का वेतन एक साथ देता है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें किसी तरह की छुट्टी नहीं दी जाती। यहां तक कि रविवार को भी उनसे काम कराया जाता है, लेकिन छुट्टी के दिनों का वेतन नहीं दिया जाता। वे अपनी समस्याओं को लेकर नगर परिषद के अधिकारियों से भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
सफाई कर्मचारियों ने ठेकेदार और प्रशासनिक अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बार-बार वेतन की मांग के बावजूद प्रशासन ने उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके बकाया वेतन का भुगतान नहीं हुआ, तो नगर परिषद के सभी कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे। उनका कहना है कि यह हड़ताल केवल ठेकेदार के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों की ओर से सांकेतिक रूप से शुरू की गई है। लेकिन वेतन न मिलने की स्थिति में इसका दायरा बढ़ सकता है।
यह हड़ताल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति से नगर परिषद के कामकाज और शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी इस समस्या का समाधान करता है और कर्मचारियों को उनका हक दिलवाता है।




