श्रद्धा की प्रतीक स्थली अब जल के गर्भ में
हरियाणा, राजस्थान, पंजाब सहित कई राज्यों से श्रद्धालु प्रतिवर्ष इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सावन माह में तो यहाँ भक्तों की भारी भीड़ जुटती है, लेकिन इस बार बारिश ने सबकुछ बदल कर रख दिया। मंदिर परिसर में 12 से 15 फीट तक पानी भर गया है। मंदिर की सीढ़ियाँ, गलियारे, मूर्तियाँ सब कुछ जलमग्न हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 1995 के बाद यह सबसे भयावह स्थिति है जब मंदिर इस तरह पानी में डूबा है। उस समय भी क्षेत्र में बाढ़ आई थी, लेकिन इस बार स्थिति और भी गंभीर प्रतीत हो रही है।
सड़क और मंदिर परिसर बने तालाब
जहां पहले मंदिर परिसर में लोहे की ग्रिल और चलने के लिए पक्की सड़क हुआ करती थी, वहाँ अब सिर्फ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। पुजारी परिवार ने अस्थायी रूप से भैरू बाबा की तस्वीर स्थापित कर श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था की है, लेकिन श्रद्धालु भी इस जलभराव से भयभीत और निराश नजर आ रहे हैं।
प्रशासन ने मंदिर का संचालन टेंडर पर दिया
बताया गया है कि भैरू बाबा मंदिर का संचालन प्रशासन द्वारा 5 लाख 51 हजार रुपये की टेंडर राशि पर पुजारी परिवार को सौंपा गया है, विशेषकर सावन माह के लिए। लेकिन जब आपदा आई, तो न प्रशासन दिखा और न कोई ठोस राहत योजना। बारिश का असर सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं रहा। बासदूदा गांव की सरकारी स्कूल की बाउंड्री वॉल और एक कमरे की दीवार भी गिर गई है। गनीमत रही कि स्कूल में उस समय कोई मौजूद नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीणों ने चिंता जताई है कि यदि दोबारा बारिश हुई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों की ये अपील
स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उपाय नहीं किया गया, तो मंदिर को और नुकसान हो सकता है और श्रद्धालुजनों की श्रद्धा भी आहत होगी। साथ ही स्कूल में बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।