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CET Exam Date Controversy: हरियाणा में CET एग्जाम की तारीखों से मचा बवाल, स्कूल फेडरेशन ने उठाए सवाल- “सभी स्कूल क्यों हो बंद?”

BY: • LAST UPDATED : July 21, 2025
Inkhabar Haryana, CET Exam Date Controversy: हरियाणा में 26 और 27 जुलाई को प्रस्तावित ग्रुप-C भर्तियों के लिए होने वाली कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) परीक्षा को लेकर राज्य के निजी स्कूल संगठनों ने गहरी नाराजगी जताई है। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा घोषित परीक्षा तिथियों पर आपत्ति दर्ज की है और मांग की है कि सरकार इन तिथियों पर पुनर्विचार करे।

क्या है मामला?

HSSC द्वारा राज्यभर में आयोजित की जा रही इस परीक्षा के लिए करीब 1300 स्कूलों को परीक्षा केंद्र के रूप में चयनित किया गया है। लेकिन फेडरेशन का कहना है कि इसका असर केवल इन 1300 स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परीक्षा की लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा और अन्य कारणों से पूरे राज्य के 35,000 से अधिक स्कूलों को दो दिनों के लिए बंद करना पड़ सकता है।
फेडरेशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने चिंता जताई है कि इससे लाखों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी, जबकि केवल परीक्षा केंद्रों को ही अवकाश देना पर्याप्त होगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि प्रशासन परीक्षा आयोजन के लिए केवल चयनित स्कूलों को ही बंद रखने का निर्णय लेता, तो अन्य स्कूलों की शिक्षण प्रक्रिया सुचारु रूप से जारी रह सकती थी।

परीक्षा की तिथियों पर नाराजगी

निजी स्कूल संगठन ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं कि परीक्षा जुलाई के अंतिम शनिवार और रविवार को क्यों रखी गई, जबकि राज्य सरकार के आदेशानुसार हरियाणा के स्कूल हर महीने दूसरे शनिवार को पहले से ही बंद रहते हैं। यदि परीक्षा दूसरे शनिवार और रविवार को आयोजित होती, तो छात्रों की पढ़ाई पर न्यूनतम असर पड़ता और अतिरिक्त अवकाश की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।

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हाईकोर्ट के निर्देश का दिया हवाला

फेडरेशन ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस निर्देश का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि सरकारी परीक्षाओं या योजनाओं के कारण स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों पर असर नहीं पड़ना चाहिए। संगठन ने यह स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य सरकार के कार्यों में बाधा डालना नहीं है, लेकिन जब शिक्षा जैसी मूलभूत प्रक्रिया पर असर पड़ता है, तो इसे लेकर सवाल उठाना भी आवश्यक हो जाता है।

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सरकार से सहयोग की अपील

फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह बार-बार अदालत की शरण में नहीं जाना चाहता, लेकिन राज्य सरकार को चाहिए कि वह निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों की सहमति और सुविधाओं का ध्यान रखे। यह जरूरी है कि राज्य में सरकारी योजनाओं और परीक्षाओं को संचालित करते हुए शिक्षा व्यवस्था के संतुलन को भी बनाए रखा जाए।