तीस साल से टीचर नहीं फिर भी चल रहा कोर्स
अब फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टरों ने पीजीआई प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है: अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 10 जून से काले बिल्ले लगाकर विरोध दर्ज करेंगे और छात्रों को पढ़ाना पूरी तरह बंद कर देंगे। इससे सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में लटक सकता है।
फिजियोथेरेपी डिपार्टमेंट में छात्रों की पढ़ाई बिना किसी नियमित शिक्षक के ही पिछले 30 सालों से चल रही है। बिना ट्रेनिंग और गाइडेंस के डिग्रियां दी जा रही हैं, जिससे न केवल छात्रों के करियर पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
बार-बार प्रशासन से की गई मांगें अनसुनी
PGI Physiotherapists Association के जॉइंट सेक्रेटरी डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि विभाग को स्वतंत्र (independent) बनाने और शिक्षकों की नियुक्ति के लिए वे 2011 से लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार फाइलें टेबलों पर घूमती रही हैं और आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। उनके अनुसार, Standing Academic Committee द्वारा 8 लेक्चरर और 6 असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्टें पास हो चुकी हैं, लेकिन पीजीआई प्रशासन ने अभी तक इन्हें भरने की प्रक्रिया तक शुरू नहीं की है।
मरीजों को भी हो रही परेशानी
डॉ. अजीत ने यह भी रेखांकित किया कि केवल छात्रों को ही नहीं, बल्कि मरीजों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जब विभाग स्वतंत्र नहीं होता, तो इलाज की प्रक्रिया में समन्वय की कमी आती है और फिजियोथेरेपी जैसी अहम सेवाएं पिछड़ जाती हैं।
अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान
नाराज फिजियोथेरेपिस्टों ने अब विरोध के क्रम को आगे बढ़ाने का मन बना लिया है। वे पहले 10 जून से काले बिल्ले लगाकर काम करेंगे और यदि फिर भी प्रशासन नहीं जागा, तो छात्रों की क्लास लेना पूरी तरह बंद कर देंगे। इस स्थिति में छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है, और PGI जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग सकती है।