Inkhabar Haryana, Chandigarh News: कांग्रेस नेता और भर्ती विश्लेषक श्वेता ढुल ने सोमवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) पर आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की।
आरक्षित वर्ग और हरियाणवी उम्मीदवारों से भेदभाव
श्वेता ढुल ने आरोप लगाया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में योग्य और प्रतिभाशाली उम्मीदवारों की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय टॉपर, आईआईटी से पीएचडी करने वाली एकमात्र हरियाणवी महिला, गोल्ड मेडलिस्ट, कॉलेज टॉपर, पीजी स्कॉलर और प्रोफेसर जैसे उम्मीदवारों को भी अनदेखा कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि एचपीएससी बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को वरीयता दे रहा है, जबकि हरियाणा के प्रतिभाशाली उम्मीदवारों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
ढुल ने कहा कि आयोग ने आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के साथ भी भेदभाव किया है। इसके अलावा, उन्होंने सवाल उठाया कि भर्ती परीक्षा में हरियाणा से संबंधित कोई भी प्रश्न नहीं था, जो पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाता है।
भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने 12 वर्षों के बाद विज्ञापन संख्या 16/2024 के माध्यम से 805 आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों के पदों पर नियुक्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान कई सवाल खड़े हुए।
प्रारंभ में भर्ती केवल हरियाणा के उम्मीदवारों तक सीमित थी, लेकिन एक शुद्धिपत्र के माध्यम से बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को भी इसमें शामिल कर लिया गया। पहले चरण की स्क्रीनिंग परीक्षा में 18,000 अभ्यर्थी शामिल हुए। यह परीक्षा 100 अंकों की थी, जिसमें निगेटिव मार्किंग का प्रावधान था। परीक्षा का परिणाम 9 अक्टूबर 2024 को घोषित किया गया।
हरियाणा के उम्मीदवारों के हितों की अनदेखी
पात्रता के अनुसार, केवल 25% अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को ही अगले चरण में बैठने का मौका दिया गया। विषय ज्ञान परीक्षा (एसकेटी) 17 नवंबर को आयोजित की गई, और इसका परिणाम 3 दिसंबर 2024 को घोषित किया गया। साक्षात्कार में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को न्यूनतम 35 अंक प्राप्त करना आवश्यक था।
श्वेता ढुल ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया हरियाणा के उम्मीदवारों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि एचपीएससी ने जानबूझकर बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी है, जो हरियाणवी प्रतिभाओं के लिए एक बड़ा अन्याय है।
CBI जांच की मांग
इस भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं को देखते हुए श्वेता ढुल ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि योग्य और पात्र उम्मीदवारों के साथ न्याय हो और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।