अहमदाबाद विमान हादसा
अहमदाबाद एयरपोर्ट के एक बड़ा हादसा हुआ। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-117, जो 242 लोगों को लेकर लंदन जा रही थी, उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। विमान में 230 यात्री, 2 पायलट और 10 क्रू मेंबर सवार थे। हादसे की भयावहता इतनी थी कि राहत और बचाव कार्य के बावजूद अब तक 265 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जो सवारों की संख्या से भी अधिक है, इस ओर संकेत करता है कि आसपास के क्षेत्र में भी लोग चपेट में आए होंगे।
दुर्घटना स्थल के आस-पास धुएं और मलबे का अंबार था, और आसमान में फैली चीखें बता रही थीं कि कोई सामान्य हादसा नहीं हुआ है। इस भयानक हादसे के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री से लेकर स्थानीय प्रशासन तक सभी ने संवेदनाएं व्यक्त कीं, लेकिन सवाल भी उठे क्या इतने आधुनिक विमानों और सिस्टम्स के बावजूद हम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पा रहे हैं?
याद आया चरखी दादरी का वो काला दिन
इस हादसे ने देश के नागरिकों को 12 नवंबर 1996 की याद दिला दी वो दिन जब भारत के इतिहास की सबसे भीषण विमान दुर्घटना हुई थी। हरियाणा के चरखी दादरी के पास सऊदी अरब की फ्लाइट 763 (बोइंग 747) और कजाखस्तान की फ्लाइट 1907 (Ilyushin Il-76) हवा में एक-दूसरे से टकरा गई थीं।
यह दुर्घटना टिकाण गांव के ऊपर हुई, जहां कुछ ही पलों में आसमान आग का गोला बन गया। उस मिड-एयर कोलिजन में 349 लोगों की मौत हुई थी—312 यात्री सऊदी विमान में और 37 यात्री कजाख विमान में थे। यह टक्कर दुनिया की सबसे खतरनाक मिड-एयर दुर्घटनाओं में गिनी जाती है। इस त्रासदी की जांच में सामने आया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पायलटों के बीच सही तालमेल न होने की वजह से यह दुर्घटना हुई थी। तकनीकी कमियों और कम्युनिकेशन गैप ने वह दिन भारतीय और वैश्विक विमानन इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज कर दिया।
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