Inkhabar Haryana, Child marriage stopped in Nuh: हरियाणा के नूंह जिले में एक बार फिर बाल विवाह के खिलाफ सख्ती दिखाई गई। शुक्रवार को नूंह उपमंडल के केराका गांव में एक नाबालिग लड़की की शादी को अंतिम समय पर रोक दिया गया। इस कार्रवाई का नेतृत्व बाल विवाह निषेध अधिकारी मधु जैन ने किया। उनकी तत्परता और संवेदनशीलता से एक मासूम बच्ची का भविष्य अंधकारमय होने से बच गया।
कैसे मिली सूचना?
बाल विवाह निषेध अधिकारी मधु जैन को शुक्रवार सुबह एक गुप्त सूचना मिली कि केराका गांव में एक नाबालिग लड़की की शादी की जा रही है। बताया गया कि बारात राजस्थान के तिजारा कस्बे से आनी है और शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सूचना मिलते ही मधु जैन ने तुरंत एक टीम गठित की और खुद मौके पर पहुंच गईं। जब वे गांव पहुंचीं, तो वहां शादी की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। खाना बन चुका था, मेहमान आने लगे थे और घर में शादी का माहौल था। बारात भी कुछ ही समय में पहुंचने वाली थी।
दस्तावेज़ों से हुआ खुलासा?
मौके पर पहुंचकर सबसे पहले लड़की की उम्र की पुष्टि के लिए दस्तावेज मांगे गए। जांच में पता चला कि लड़की की उम्र 16 साल 6 महीने है। यह स्पष्ट हो गया कि लड़की विवाह योग्य न्यूनतम उम्र 18 वर्ष से काफी कम है। इसके बाद मधु जैन ने लड़की के परिजनों के साथ बातचीत की और उन्हें बाल विवाह के कानूनी और सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि लड़की की उम्र 18 और लड़के की उम्र 21 वर्ष पूरी होने से पहले शादी कराना बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत दंडनीय अपराध है।
हलफनामा लेकर छोड़ा
अधिकारी मधु जैन ने दोनों पक्षों लड़की और लड़के के परिवार से हलफनामा (शपथ पत्र) लिया कि वे विवाह तभी करेंगे जब दोनों की उम्र वैधानिक रूप से पूरी हो जाएगी। साथ ही उन्हें चेतावनी दी गई कि भविष्य में अगर कानून का उल्लंघन किया गया, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।