




मुख्यमंत्री ने संविधान की प्रस्तावना में लिखे शब्द ‘We the People’ को केवल तीन शब्द नहीं, बल्कि एकता की अपील, अखंडता की प्रतिज्ञा और जन-जन में विश्वास की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान हर नागरिक को विचारों की स्वतंत्रता और समान अवसर प्रदान करता है। यह समावेशी दृष्टिकोण देश की प्रगति और भाईचारे को सुनिश्चित करता है।
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि संविधान दिवस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर की थी। यह दिन भारतीय लोकतंत्र की महान परंपराओं और मूलभूत अधिकारों का सम्मान करने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि संविधान निर्माण में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे, और यह दस्तावेज भारत की विविधता को एकता में पिरोने वाला अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे संविधान के मूल मंत्र को गहराई से समझें। इससे उनमें संविधान के प्रति निष्ठा बढ़ेगी और वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति अधिक जागरूक बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने संविधान को “Dignity for India and Unity for India” के मूल मंत्र को साकार करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धारा 370 और 35ए को हटाकर अखंड भारत के सपने को साकार किया। यह संविधान के लोकतांत्रिक सिद्धांतों और एकता की भावना को मजबूत करता है।




