




Inkhabar Haryana, Collector Rate increase in Haryana: हरियाणा में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आने वाला है। राज्य सरकार ने कलेक्टर रेट्स में 5% से लेकर 25% तक की संभावित वृद्धि को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस फैसले पर अंतिम मुहर लगा दी है और इसे 1 अगस्त 2025 से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इस निर्णय का सीधा असर आम जनता, रियल एस्टेट कारोबारियों और निवेशकों पर पड़ेगा, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अंतर्गत आते हैं।
सीएम की स्वीकृति के बाद प्रदेश की सभी तहसीलों में 30 और 31 जुलाई को नई रजिस्ट्री की प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है। इन दो दिनों में सिर्फ उन्हीं दस्तावेजों की रजिस्ट्री की जाएगी, जिनके लिए पहले से अपॉइंटमेंट बुक किया गया है। इस संबंध में सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को शासन की ओर से आधिकारिक पत्र भेजा गया है, जिसमें दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
कलेक्टर रेट किसी भी जिले में जमीन की वह न्यूनतम दर होती है, जिस पर सरकारी रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी की बिक्री और खरीद की रजिस्ट्री दर्ज की जाती है। इन दरों के आधार पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस निर्धारित होती है। यह रेट स्थानीय मार्केट ट्रेंड, क्षेत्रीय मांग और भूमि उपयोग के आधार पर समय-समय पर संशोधित किए जाते हैं। कलेक्टर रेट में बदलाव सीधे तौर पर सरकार के राजस्व और आमजन के आर्थिक बोझ से जुड़े होते हैं।
वित्त विभाग की प्रमुख सुमिता मिश्रा ने कुछ दिन पहले ही यह संकेत दे दिए थे कि सरकार कलेक्टर रेट बढ़ाने के पक्ष में है। हालांकि, पहले यह कहा गया था कि दरों को अंतिम रूप देने से पहले जनता से सुझाव और आपत्तियां ली जाएंगी। लेकिन अब मुख्यमंत्री द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद सारी अटकलें समाप्त हो गई हैं।
पिछले वर्ष भी यह फैसला टल चुका था। पहले 1 अप्रैल 2024 से रेट बढ़ाए जाने थे, लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनावों के चलते इसे टालकर 1 दिसंबर 2024 से लागू किया गया। वहीं, इस वर्ष 1 अप्रैल 2025 से प्रस्तावित दरों को लागू नहीं किया गया था, लेकिन अब 1 अगस्त 2025 से यह लागू हो जाएंगे।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के जिले जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और सोहना में जमीन के बाजार भाव पहले से ही काफी अधिक हैं। ऐसे में नए कलेक्टर रेट लागू होने से यहां की प्रॉपर्टी की सरकारी कीमत और अधिक हो जाएगी। इसके चलते जमीन की रजिस्ट्री कराना यहां और भी महंगा हो जाएगा। प्रॉपर्टी पर स्टांप ड्यूटी अधिक देनी होगी, जिससे खरीददारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।




