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Collector rates in Haryana: हरियाणा में कलेक्टर रेट पर ब्रेक! सरकार ने वापस लिया 1 अगस्त से लागू होने वाला आदेश

BY: • LAST UPDATED : July 25, 2025
Inkhabar Haryana, Collector rates in Haryana: हरियाणा सरकार ने राज्यवासियों को थोड़ी राहत देते हुए कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी संबंधी अपना पिछला आदेश वापस ले लिया है। 1 अगस्त 2025 से प्रस्तावित नई दरें फिलहाल लागू नहीं होंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी, लेकिन तब तक पुरानी दरें ही प्रभावी रहेंगी।

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क्या था मामला?

कुछ दिन पहले ही राज्य सरकार ने निर्देश जारी कर कहा था कि 1 अगस्त से प्रदेश के सभी जिलों में संशोधित कलेक्टर रेट लागू कर दिए जाएंगे। ये रेट, जमीन की न्यूनतम सरकारी कीमत को दर्शाते हैं, जिस पर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री की जाती है। दरअसल, ये दरें रियल एस्टेट की सरकारी बुनियादी मूल्य निर्धारण प्रणाली का आधार होती हैं।

पिछले साल की बढ़ोतरी का परिप्रेक्ष्य

2024 में भी कलेक्टर रेट में 12 से 32 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई थी। एनसीआर (नेशनल कैपिटल रीजन) में स्थित जिलों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोहना, पटौदी, बल्लभगढ़ आदि—में यह बढ़ोतरी अधिक रही थी, जहां 30% तक रेट बढ़ाए गए थे। वहीं रोहतक, पलवल, सोनीपत, करनाल और पानीपत जैसे जिलों में लगभग 20% की बढ़ोतरी की गई थी।

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दिल्ली से सटे इलाकों में भूमि की मांग और कीमतों में तेजी से उछाल के चलते कलेक्टर रेट में भी लगातार संशोधन हो रहे हैं। हालांकि ये रेट बाजार मूल्य से फिर भी कम होते हैं, मगर रजिस्ट्री पर लगने वाले स्टांप शुल्क और अन्य सरकारी कर इन्हीं दरों पर आधारित होते हैं।

अब क्या हुआ बदलाव?

सरकार ने अब यह घोषणा की है कि 1 अगस्त से नई दरें लागू नहीं होंगी। इस आशय की एक नई चिट्ठी जिला प्रशासन को भेजी गई है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि कलेक्टर रेट फिलहाल यथावत रहेंगे और नई दरें अधिसूचना के माध्यम से बाद में लागू की जाएंगी।

इस फैसले को सरकार के एक तरह के ‘यू-टर्न’ के रूप में देखा जा रहा है, जो संभवतः जनता की प्रतिक्रियाओं, राजनीतिक परिस्थितियों या बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए लिया गया है।

कलेक्टर रेट का महत्व क्या है?

  • सरकारी मूल्य निर्धारण: कलेक्टर रेट वह न्यूनतम मूल्य है जिस पर जमीन या संपत्ति की कानूनी रजिस्ट्री होती है।
  • स्टांप ड्यूटी: इसी दर के आधार पर स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क की गणना होती है।
  • बाजार नियंत्रण: यह दरें जमीन की कालाबाजारी और अघोषित सौदों को रोकने में सहायक होती हैं।

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