Inkhabar Haryana, Crisis of Drinking Water in Haryana: हरियाणा के भिवानी जिले में इन दिनों भीषण पेयजल संकट ने आमजन का जीवन बेहाल कर दिया है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि शहर और आस-पास के गांवों में लोगों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। कहीं पानी की आपूर्ति अत्यंत कम दबाव में हो रही है, तो कहीं सीवरेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिलकर आ रहा है। इस संकट को लेकर आज मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) का एक प्रतिनिधिमंडल जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षक अभियंता (एसई) दलबीर सिंह दलाल और कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) सूर्यकांत से मिला।
सीवरेज का गंदा पानी पेयजल में हो रहा सप्लाई
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व माकपा जिला सचिव कामरेड ओमप्रकाश और सचिव मंडल सदस्य सुखदेव पालवास ने किया। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के समक्ष जिले में व्याप्त पेयजल संकट की गंभीरता को विस्तार से रखते हुए त्वरित और ठोस कदम उठाने की मांग की। कामरेड ओमप्रकाश ने बताया कि शहर के मध्यवर्ती क्षेत्रों, कालोनियों, मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति या तो नगण्य है या अत्यंत निम्न दबाव में हो रही है। कई जगहों पर तो सीवरेज का गंदा पानी पेयजल में मिलकर सप्लाई हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।
23 मई के बाद होगा पानी उपलब्ध
अधिकारियों से हुई बातचीत के दौरान यह जानकारी सामने आई कि नहरों में 23 मई के बाद ही पानी उपलब्ध होगा, जिससे पहले पानी संकट से निपटना बड़ी चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि शहर के 15 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 173.90 फीट है, जबकि इस समय मात्र 36.9 फीट पानी शेष है, जो कि कुल क्षमता का केवल 21.21 प्रतिशत है। हालात से निपटने के लिए विभाग ने 9 नए ट्यूबवेल लगाए हैं और अब एक दिन छोड़कर दो दिन बाद पानी की आपूर्ति की जाएगी। जिन क्षेत्रों में नल कनेक्शन से पानी नहीं पहुंच पाएगा, वहां विभाग सार्वजनिक रूप से टैंकरों के माध्यम से जल वितरण करेगा।
पानी के लिए केंद्र सरकार की मदद की जाए
कामरेड ओमप्रकाश ने बताया कि माकपा ने को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भाग लेकर सुझाव दिया था कि हरियाणा को बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड) से अपने हिस्से के 4500 क्यूसिक अतिरिक्त पानी की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार की मदद ली जाए। उन्होंने सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ट्रिपल इंजन सरकारें केंद्र, राज्य और स्थानीय जनता की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर रही हैं। माकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकारें इस संकट की प्रमुख जिम्मेदार हैं और उन्होंने जनता को जल संकट में धकेल दिया है।