क्या हैं पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, कालांवाली के एक मेडिकल स्टोर संचालक को सीआईए स्टाफ और ड्रग कंट्रोल अधिकारियों ने धमकी दी कि उसके स्टोर पर नशे का अवैध कारोबार चलने की गुप्त सूचना है। इसी आधार पर उससे 7.5 लाख रुपये की जबरन वसूली की गई। संचालक ने डर के मारे राशि तो दे दी, लेकिन बाद में यह बात राजनीतिक हलकों तक पहुंच गई, जिससे मामला तूल पकड़ गया।
विधायक और पूर्व विधायक का डीएसपी से मिलना
मामले की गंभीरता को देखते हुए कालांवाली के वर्तमान विधायक शीशपाल केहरवाला और पूर्व विधायक बलकौर सिंह खुद डीएसपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने वहां एक ज्ञापन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और आरोपी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
विधायक केहरवाला ने कहा कि यह केवल वसूली नहीं है, यह उस तंत्र की पोल खोलता है जो नशे के कारोबार की जड़ में बैठा है। अगर इस पर अभी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा। पूर्व विधायक बलकौर सिंह ने भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे पुलिसकर्मी पूरे विभाग की छवि को धूमिल कर रहे हैं। उन्होंने ईमानदार अधिकारियों को अलग करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
डीएसपी का आश्वासन
कालांवाली डीएसपी ने दोनों नेताओं को आश्वस्त किया कि वे पूरे मामले की गंभीरता को समझते हैं और जांच जल्द शुरू की जाएगी। डीएसपी ने कहा कि यदि किसी अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी दोनों स्तरों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मेडिकल संचालक से पूरी जानकारी लेकर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
इस घटना के बाद कालांवाली में मेडिकल और अन्य व्यापार से जुड़े व्यवसायियों में भय का माहौल है। कई दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे लगातार दबाव और डर में काम कर रहे हैं। किसी भी निरीक्षण को पैसों की मांग में बदल दिया जाता है। एक मेडिकल संचालक ने कहा कि अगर यह मामला उजागर नहीं होता तो शायद हमें हमेशा चुप रहना पड़ता। आज डर इस बात का है कि कहीं ईमानदारी ही सज़ा न बन जाए।
कांग्रेस का मुखर रुख, CBI जांच की मांग
विधायक केहरवाला ने घोषणा की कि वे इस मामले में मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार का उदाहरण है। ड्रग्स केवल युवाओं को नहीं, पूरे समाज को खोखला कर रहा है। और अगर इसमें तैनात अफसर ही शामिल हों, तो हालात और गंभीर हो जाते हैं। यह मामला नगर पालिका चुनाव से ठीक पहले सामने आया है, जिससे इसका सीधा असर स्थानीय राजनीति पर देखा जा सकता है। कांग्रेस ने इसे “जनता की आवाज़” बताते हुए इस पर सख्त रुख अपनाया है, जबकि अन्य दलों से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।