कैसे हुआ खुलासा?
सिविल अस्पताल की तीसरी मंजिल पर “मेडिट्रीना हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड” द्वारा संचालित हार्ट सेंटर में एक डॉक्टर पंकज मोहन शर्मा खुद को कार्डियोलॉजिस्ट बताकर इलाज कर रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस ने संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की, जिसमें सामने आया कि डॉ. पंकज मोहन शर्मा की डिग्रियां और दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी हैं।
किन पर दर्ज हुआ मामला?
फरीदाबाद पुलिस ने 7 अलग-अलग धाराओं में 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपी सिर्फ एक फर्जी डॉक्टर नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क से जुड़े उच्च पदस्थ लोग हैं, डॉ. एन प्रताप कुमार CMD, मेडिट्रीना हॉस्पिटल, दिलीप नायर HR हेड, पीयूष श्रीवास्तव सेंटर हेड और फाइनेंस मैनेजर, अजय शर्मा सेंटर हेड, मनदीप सेंटर हेड, डॉ. पंकज मोहन शर्मा फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट पुलिस जांच में साफ हो गया कि न केवल फर्जी डिग्री वाले डॉक्टर ने मरीजों की जान से खिलवाड़ किया, बल्कि पूरे संस्थान ने इस लापरवाही को नजरअंदाज किया, जिससे कई लोगों की जान खतरे में पड़ी।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर चल रहा था सेंटर
यह हार्ट सेंटर Public Private Partnership (PPP) मोड पर चलाया जा रहा था, जहां सरकारी इमारत में निजी संस्था मेडिट्रीना हॉस्पिटल सेवाएं दे रही थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी तंत्र और स्वास्थ्य विभाग ने इस सेंटर के संचालन और कर्मचारियों की जांच क्यों नहीं की? पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से जांच की जा रही है। संबंधित सभी दस्तावेजों की वैधता की दोबारा पुष्टि की जा रही है और जरूरत पड़ने पर अन्य लोगों को भी इस मामले में शामिल किया जा सकता है।