Advertisement
Advertisement
होम / Fake Cardiologist in Faridabad: फरीदाबाद के इस अस्पताल में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट का हुआ खुलासा, 70 से ज्यादा हार्ट सर्जरी कर डालीं, अब हो रही जांच

Fake Cardiologist in Faridabad: फरीदाबाद के इस अस्पताल में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट का हुआ खुलासा, 70 से ज्यादा हार्ट सर्जरी कर डालीं, अब हो रही जांच

BY: • LAST UPDATED : June 10, 2025
Inkhabar Haryana, Fake Cardiologist in Faridabad: हरियाणा के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक, बादशाह खान सिविल अस्पताल (बीके अस्पताल), इन दिनों एक चौंकाने वाले खुलासे को लेकर सुर्खियों में है। यहां के हार्ट सेंटर में एक फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट ने पिछले कई महीनों में न केवल नौकरी की बल्कि 70 से 80 तक की हार्ट सर्जरी कर डाली। जिस डॉक्टर को अस्पताल का विशेषज्ञ माना जा रहा था, वह असल में अपने जैसे नाम वाले किसी और डॉक्टर की डिग्री और पहचान का दुरुपयोग कर रहा था।

CM Nayab Saini flight inauguration of Hisar to Chandigarh: हिसार से चंडीगढ़ के लिए फ्लाइट सेवा शुरू, सीएम नायब सैनी ने दिखाई हरी झंडी, खुद भी करेगे सफर

कैसे हुआ खुलासा?

यह मामला तब सामने आया जब सामाजिक कार्यकर्ता संजय गुप्ता को इस डॉक्टर की पहचान पर संदेह हुआ। उन्हें यह सूचना मिली कि बीके अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर पंकज मोहन असल में फर्जी हैं और उन्होंने किसी असली डॉक्टर के नाम और दस्तावेजों का उपयोग कर नौकरी प्राप्त की है। संजय गुप्ता ने खुद अपने स्तर पर इसकी जांच शुरू की और कई प्रमाण जुटाए। जब उन्हें पर्याप्त सबूत मिले, तो उन्होंने 3 नंबर पुलिस चौकी के साथ-साथ फरीदाबाद के सिविल सर्जन को शिकायत दी। लेकिन इस शिकायत पर तुरंत कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

Advertisement

पुलिस तक मामला पहुंचा

बाद में संजय गुप्ता ने डीसीपी एनआईटी, मकसूद अहमद से मुलाकात की और उन्हें सभी दस्तावेज सौंपे। डीसीपी ने तत्काल मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा, “शिकायत मिलने के बाद पुलिस गहराई से दस्तावेजों की जांच कर रही है और जो भी साक्ष्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”

डॉक्टर की नियुक्ति और हटाने की कहानी

जानकारी के अनुसार, बीके अस्पताल के हार्ट सेंटर की शुरुआत 2018 में हरियाणा सरकार और Meditrina Hospitals Pvt. Ltd. के बीच हुए एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) अनुबंध के तहत हुई थी। जुलाई 2023 में इस सेंटर में डॉक्टर पंकज मोहन की नियुक्ति की गई थी। हालांकि, फरवरी 2025 में जब उन पर फर्जीवाड़े का संदेह गहराया, तो उन्हें पद से हटा दिया गया।

मजेदार बात यह है कि अस्पताल प्रशासन ने उनकी नियुक्ति से पहले जरूरी वैरिफिकेशन की प्रक्रिया को ही दरकिनार कर दिया। जबकि अनुबंध में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान था कि सभी नियुक्त डॉक्टरों की जांच सिविल सर्जन और पीएमओ कार्यालय द्वारा की जाएगी।

अस्पताल प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर उठें सवाल

इतना ही नहीं, आरोप है कि फर्जी डॉक्टर ने आयुष्मान भारत योजना, बीपीएल और आरक्षित श्रेणी के मरीजों के नाम पर फर्जी बिल भी लगाए। इससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ और जरूरतमंद मरीजों को झूठी चिकित्सा सेवा के नाम पर ठगा गया। इस पूरे मामले में बीके अस्पताल के प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीएमओ सत्येंद्र वशिष्ठ ने बताया कि उन्हें पुलिस चौकी से डॉक्टर के कागजात मांगे गए थे और वे कागज पुलिस को सौंप दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस इस समय मामले की जांच कर रही है।