जर्जर दीवारें, दरकती छतें और डर का माहौल
स्कूल की इमारत की हालत बेहद खराब है। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं, छत से प्लास्टर झड़ रहा है और कई कमरों को तो खतरनाक बताते हुए बंद भी कर दिया गया है। स्कूल के साइंस टीचर सतीश कुमार ने बताया कि पूरी इमारत एक साथ बच्चों का बोझ नहीं झेल सकती, इसलिए हमें दो शिफ्टों में पढ़ाना पड़ रहा है। कई बार हमने शिक्षा विभाग को पत्र लिखे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बच्चों ने भी बताया कि वे हर रोज़ डर के साए में पढ़ाई करते हैं। कोई नहीं जानता कि कब कौन-सी दीवार गिर पड़े या छत का कोई हिस्सा ढह जाए। एक महीने पहले लंच टाइम के दौरान एक कक्षा की छत से प्लास्टर गिरा था। सौभाग्य से उस समय वहां कोई छात्र नहीं था, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था।
ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन तारें
स्थिति को और गंभीर बनाता है स्कूल भवन के ऊपर से गुजरने वाली हाई टेंशन बिजली की लाइन। एक मामूली सी लापरवाही भी यहां जानलेवा साबित हो सकती है। छात्रों और अभिभावकों ने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस विद्यालय को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं, कार्रवाई नहीं।
छह साल में नहीं हुई एक इंच भी प्रगति