




अधिकारियों ने किसान नेता को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी दोहराते हुए कहा किआपकी जिंदगी बहुत कीमती है। आपके स्वास्थ्य में जो समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, उनका इलाज जरूरी है। कृपया इस पर विचार करें।
इसके जवाब में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि मेरी जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण उन 7 लाख किसानों की जिंदगी है, जिन्होंने सरकार की गलत नीतियों के कारण आत्महत्या की। मेरी कुर्बानी उनके संघर्ष से कम नहीं होगी। डल्लेवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक किसानों की मांगे पूरी नहीं होंगी, उनका अनशन जारी रहेगा। उन्होंने बाहरी मेडिकल सहायता लेने से इनकार कर दिया।
डल्लेवाल ने सरकार को संदेश देते हुए कहा कि सरकार को यह विचार करना चाहिए कि किसानों की मांगे कब और कैसे पूरी होंगी। जिस दिन किसानों की समस्याओं का समाधान होगा, उसी दिन मेरा अनशन खत्म होगा। नहीं तो मैं अपनी कुर्बानी देने के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हूं।
इस बीच किसान संघर्ष समिति के अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि अधिकारियों का आना सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि बातचीत से हल निकल सकते हैं, लेकिन परिणाम कब आएगा, यह समय बताएगा।
खनौरी बॉर्डर पर डल्लेवाल का अनशन किसानों की समस्याओं और उनके भविष्य के लिए एक बड़ा प्रतीक बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट और अधिकारियों की सक्रियता ने उम्मीद तो जगाई है, लेकिन किसान नेता का यह संदेश सरकार के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि समाधान अब वक्त की मांग है।




