




सुप्रीम कोर्ट ने एचपीसी का गठन पंजाब की शंभू और खनौरी सीमाओं पर किसानों के आंदोलन के कारण उत्पन्न स्थिति को हल करने के लिए किया था। इस समिति का उद्देश्य किसानों और संबंधित पक्षों के साथ चर्चा कर उनके मुद्दों का समाधान निकालना है।
हालांकि, एसकेएम ने स्पष्ट किया है कि वह उस आंदोलन का हिस्सा नहीं है, जो एचपीसी के गठन का कारण बना। इसके बावजूद समिति द्वारा एसकेएम को बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया।
एसकेएम ने कहा कि 2 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में किसानों को राजनीतिक दलों और मुद्दों से खुद को दूर रखने की सलाह दी थी। इसके साथ ही, कोर्ट ने किसानों के सभी मुद्दों पर अपने हस्तक्षेप से विचार करने की बात कही थी।
लेकिन एसकेएम का मानना है कि किसानों का संघर्ष नीतिगत और राजनीतिक प्रकृति का है, जिसे केवल केंद्र सरकार ही हल कर सकती है। इसीलिए, उन्होंने न्यायालय द्वारा गठित समिति के साथ चर्चा में शामिल होने को अप्रासंगिक माना।
किसानों के आंदोलन ने हाल के वर्षों में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश को प्रदर्शित किया है। तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए चलाए गए लंबे आंदोलन के बाद भी, किसानों की मांगें पूरी तरह से नहीं मानी गई हैं। इस दौरान, किसानों ने न्यायपालिका से दूरी बनाए रखते हुए केंद्र सरकार से सीधी बातचीत को ही प्राथमिकता दी।




