Inkhabar Haryana, Ghaggar River water level: हरियाणा के फतेहाबाद ज़िले में स्थित घग्गर नदी इन दिनों अपने उफान पर है। बीते पांच दिनों से नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। खासकर तटीय इलाकों में रहने वाले किसानों और आम जनों की चिंता दिन-प्रतिदिन गहराती जा रही है। इस जलस्तरीय वृद्धि के पीछे मुख्य कारण हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में हो रही लगातार तेज़ बारिश को माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर घग्गर नदी के प्रवाह को प्रभावित कर रही है।
बीते 5 दिन बढ़ता गया जलस्तर
घग्गर नदी का जलस्तर बीते सप्ताह के अंत से ही धीरे-धीरे चढ़ने लगा था, लेकिन बीते 48 घंटों में इसमें जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। वीरवार शाम तक नदी के गुहला चीका हेड पर जलप्रवाह 24394 क्यूसेक था, जो शुक्रवार सुबह तक बढ़कर 32000 क्यूसेक के पार पहुंच गया। यह आंकड़ा प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों के लिए चिंता का कारण बन गया है।
वहीं, जाखल क्षेत्र से गुजरने वाली नदी की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। शुक्रवार सुबह यहां का जलस्तर 5350 क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि महज 12 घंटे पहले यानी गुरुवार रात यह आंकड़ा 4600 क्यूसेक था। यानि सिर्फ 12 घंटे में ही लगभग 750 क्यूसेक की वृद्धि हुई है।
हिमाचल की बारिश बनी मुसीबत
विशेषज्ञों और जल विभाग के अधिकारियों का मानना है कि घग्गर नदी के जलस्तर में इस अचानक हुई वृद्धि का सीधा संबंध हिमाचल प्रदेश में हो रही भारी बारिश से है। वहां से बहता पानी जब पंजाब और हरियाणा के मैदानी इलाकों की ओर आता है, तो घग्गर जैसी मौसमी नदियों का जलस्तर तेज़ी से बढ़ने लगता है।
हालांकि विभागीय अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि यदि हिमाचल और आसपास के क्षेत्रों में बारिश स्थिर हो गई, तो अगले 24 से 48 घंटे में नदी का जलस्तर गिरावट की ओर जा सकता है। लेकिन मौजूदा परिदृश्य में हालात नियंत्रण में नजर नहीं आ रहे।
प्रशासन सतर्क लेकिन ग्रामीणों में डर
लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी है। संबंधित क्षेत्रों में निगरानी के लिए अधिकारियों की टीमों को तैनात किया गया है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की गई है। तटीय गांवों में रहने वाले किसानों की फसलें जलभराव से प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। कई किसानों का कहना है कि यदि यह जलस्तर इसी तरह दो-तीन दिन और बढ़ता रहा, तो धान, कपास और सब्जियों जैसी मौसमी फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।