




डॉ. कुमार विश्वास ने अपने संबोधन में भगवद्गीता की गहराई और इसकी सार्वभौमिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गीता एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें 100 पीएचडी से भी अधिक शोध का विषय समाहित है। यह ग्रंथ न केवल भारतीय संस्कृति का आधार है, बल्कि पूरे संसार की समस्याओं का समाधान भी इसमें छिपा है। उन्होंने युवाओं को गीता के उपदेशों को अपनाने और अपने जीवन में धारण करने का संदेश दिया।
डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं और विचारों से पंडाल में मौजूद हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे ही वे मंच पर आए, दर्शकों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। अपनी कविताओं के माध्यम से उन्होंने भारतीय संस्कृति, देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। उनके साथ कवि रमेश मुस्कान, कविता तिवारी, सुदीप भोला और दिनेश बावरा ने भी अपनी प्रस्तुति दी। इन कवियों ने वर्तमान समय की चुनौतियों, शिक्षा व्यवस्था और वीर जवानों की गाथाओं पर व्यंग्य और प्रेरक कविताओं के माध्यम से श्रोताओं का दिल जीता।
इस आयोजन के दौरान पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा और उपायुक्त नेहा सिंह ने सभी कलाकारों और कवियों को सम्मानित किया। सांस्कृतिक सत्र में कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और संगीत के माध्यम से महोत्सव को और भी रंगीन बनाया।




