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Gokul Setia on Action Mode: फिर से रौद्र रुप में दिखे सिरसा विधायक गोकुल सेतिया, ठेकेदार व अफसरों को लगाई तगड़ी फटकार

BY: • LAST UPDATED : August 12, 2025
Inkhabar Haryana, Gokul Setia on Action Mode: सिरसा के आनंद विहार इलाके में नगर परिषद के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने क्षेत्र का निरीक्षण किया, जहां दो माह पहले बनी गलियां जगह-जगह से धंस और टूट चुकी थीं। इस पर विधायक ने मौके पर ही नगर परिषद अधिकारियों को फोन कर ठेकेदार व संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

निरीक्षण में मिली गंभीर खामियां

विधायक गोकुल सेतिया ने सोमवार को क्षेत्र का दौरा किया और स्थानीय लोगों से जनसमस्याएं सुनीं। निरीक्षण के दौरान वे गली नंबर-6 पहुंचे, जहां वार्डवासियों ने बताया कि विजय झूंथरा नामक ठेकेदार ने करीब दो माह पहले इंटरलॉकिंग गली का निर्माण किया था, लेकिन यह गली अब कई जगहों से धंस गई है और किनारों से टूट चुकी है।

विधायक ने मौके पर देखा कि 400 फीट लंबी इस गली में पानी की पाइपलाइन नहीं डाली गई थी। नतीजतन, ठेकेदार ने लगभग 150 फीट हिस्सा अधूरा ही छोड़ दिया। इसके अलावा, जिन गलियों का निर्माण पूरा किया गया है, उन पर भी घटिया निर्माण के आरोप लगे हैं।

फोन पर दी सख्त चेतावनी

विधायक सेतिया ने निरीक्षण के दौरान डीएमसी को फोन कर कहा कि इस तरह का घटिया काम करने वाली एजेंसियों और ठेकेदारों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गली का निर्माण गुणवत्ता के साथ करवाना ही होगा और दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई भी करनी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर परिषद ऐसे ठेकेदारों पर मेहरबानी दिखा रही है, जो जनता के पैसों से किए गए विकास कार्यों में लापरवाही बरतते हैं।

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बोर्ड न लगाने पर भी उठे सवाल

नगर परिषद के नियमों के अनुसार, किसी भी निर्माण कार्य के बाद ठेकेदार को एक बोर्ड लगाना अनिवार्य है, जिसमें टेंडर की कीमत, वारंटी अवधि, ठेकेदार का नाम व मोबाइल नंबर जैसी पूरी जानकारी हो। लेकिन आनंद विहार में बने किसी भी गली में ऐसा बोर्ड नहीं लगाया गया है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि बोर्ड लगने से जनता सीधे तौर पर शिकायत कर सकती है और फर्जी बिल पास करने जैसी गड़बड़ियों का पर्दाफाश हो सकता है।

 

यहां देखें वीडियो

अधिकारियों का तर्क और जनता की नाराज़गी

सूत्रों के अनुसार, पहले भी कई सड़कों के फर्जी बिल पास किए गए हैं, जबकि वे सड़कें बनी ही नहीं थीं। बोर्ड लगने से ऐसे मामलों का खुलासा हो सकता है, लेकिन अधिकारियों का तर्क है कि नशेड़ी अक्सर बोर्ड चोरी कर लेते हैं। इस दलील पर स्थानीय लोग नाराज हैं और इसे जिम्मेदारी से बचने का बहाना बता रहे हैं।