Inkhabar Haryana, Gurugram News: तकनीक और डिजिटलीकरण ने आधुनिक समाज को पूरी तरह से बदल दिया है। हालांकि, इसके कई लाभ हैं, लेकिन इसके नकारात्मक प्रभाव भी कम नहीं हैं। डिजिटल युग में जहां सूचना तक पहुंच आसान हुई है, वहीं लोग सामाजिक रूप से आइसोलेट भी हो रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं। इसी विषय पर गहन विचार-विमर्श करने के लिए गुरुग्राम विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में दुनिया भर के विशेषज्ञ, शोधकर्ता और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया और मानसिक स्वास्थ्य व डिजिटलीकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
संगोष्ठी का उद्देश्य और मुख्य विषय
इस संगोष्ठी का आयोजन गुरुग्राम विश्वविद्यालय में साइकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर गायत्री रैना के नेतृत्व में किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य पर डिजिटलीकरण के प्रभाव, आधुनिक समाज में तकनीक के बढ़ते दखल, युद्ध और विस्थापन की चुनौतियों तथा इनके समाधान पर चर्चा करना था।
इस दो दिवसीय संगोष्ठी में कुल छह तकनीकी सत्र (Technical Sessions) आयोजित किए गए, जिनमें मनोविज्ञान की विभिन्न धाराओं पर चर्चा की गई। संगोष्ठी में चार अमेरिकन फुलब्राइट फेलो भी शामिल हुए, जिन्होंने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अपनी विशेषज्ञता साझा की।
मानसिक स्वास्थ्य पर डिजिटलीकरण का प्रभाव
तकनीक और डिजिटल मीडिया हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इसके कारण सामाजिक अलगाव (Social Isolation) बढ़ रहा है। लोग स्क्रीन पर अधिक समय बिता रहे हैं, जिससे उनका वास्तविक दुनिया से जुड़ाव कम हो रहा है। यह प्रवृत्ति मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को जन्म दे रही है। संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने इस विषय पर चर्चा की कि कैसे कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT) और अन्य मनोवैज्ञानिक विधियां इस समस्या से निपटने में सहायक हो सकती हैं।
दुनिया के कई हिस्सों में जारी युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता के कारण लाखों लोग विस्थापन का शिकार हो रहे हैं। यह प्रवास न केवल सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को जन्म देता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है। संगोष्ठी में यह चर्चा हुई कि इन परिस्थितियों में मनोवैज्ञानिक समर्थन कैसे दिया जाए और विस्थापित लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कौन-कौन सी रणनीतियां अपनाई जा सकती हैं।
प्रमुख वक्ता और उनकी प्रस्तुतियां
इस संगोष्ठी में मानसिक स्वास्थ्य और मनोविज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। प्रोफेसर एस. पी. के. जैना और डॉक्टर निमिषा कुमार ने कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT) के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि यह तकनीक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान में कारगर हो सकती है।