Inkhabar Haryana, Haryana Assembly Monsoon Session 2025: हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में 50 वर्ग गज तक और ग्रामीण क्षेत्रों में 100 वर्ग गज तक के आवासीय भूखंडों पर अब स्टांप शुल्क नहीं लिया जाएगा। यानी ऐसे छोटे भूखंडों की खरीद-फरोख्त पर खरीदारों को कोई अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी नहीं चुकानी पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह प्रावधान प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना और मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत खरीदी जाने वाली संपत्तियों पर लागू होगा।
कलेक्टर दरों पर विपक्ष का विरोध
दरअसल, सदन में यह घोषणा तब हुई जब इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) की ओर से हाल ही में बढ़ाई गई कलेक्टर दरों को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया गया। इनेलो विधायक आदित्य देवी लाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कलेक्टर दरों में भारी वृद्धि के कारण आम लोगों के लिए मकान खरीदना मुश्किल हो गया है। उनका कहना था कि जनता इस फैसले से बेहद नाराज है और इसका सीधा असर रियल एस्टेट बाजार व मध्यम वर्ग की जेब पर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री का पलटवार
मुख्यमंत्री सैनी ने विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा कि कलेक्टर दर बढ़ाने का मकसद जनता पर बोझ डालना नहीं बल्कि जमीन-जायदाद के सौदों में पारदर्शिता लाना है। उन्होंने बताया कि राज्य के कुल 2,46,812 खंडों में से 72.01 प्रतिशत में केवल 10 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी की गई है। वहीं जिन क्षेत्रों में रजिस्ट्री मूल्य कलेक्टर दर से 200 प्रतिशत तक अधिक है, वहां अधिकतम वृद्धि 50 प्रतिशत की गई है।
सीएम ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष संशोधित कलेक्टर दर को लेकर जनता को गुमराह करने का काम कर रहा है। उनके अनुसार, असली मुद्दा दरें बढ़ाने का नहीं है, बल्कि उन लोगों का है जो काले धन का उपयोग कर जमीन खरीदते हैं और स्टांप ड्यूटी से बचने की कोशिश करते हैं।
जनता को क्या मिलेगा लाभ?
स्टांप शुल्क माफ करने का सीधा फायदा गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को मिलेगा। छोटे आकार के भूखंडों पर पंजीकरण कराने के लिए अब उन्हें अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा। इससे न केवल मकान खरीदना आसान होगा बल्कि आवास योजनाओं में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।