Advertisement
Advertisement
होम / Haryana Mock drill 2025: पलवल में बड़ी मॉक ड्रिल, प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम अलर्ट मोड में

Haryana Mock drill 2025: पलवल में बड़ी मॉक ड्रिल, प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम अलर्ट मोड में

BY: • LAST UPDATED : August 1, 2025
Inkhabar Haryana, Haryana Mock drill 2025: हरियाणा के पलवल किसी भी आपदा की स्थिति में समय पर और समन्वित प्रतिक्रिया ही जन-धन की रक्षा की कुंजी होती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हरियाणा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में आज नागरिक अस्पताल पलवल में एक वृहद स्तर की मॉक ड्रिल ‘अभ्यास सुरक्षा चक्र’ का आयोजन किया गया। यह मॉक ड्रिल आपदा के दौरान जिला स्तरीय तैयारियों और समन्वय क्षमताओं को परखने के लिए की गई थी।

ये वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

इस अभ्यास के दौरान उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, एसडीएम ज्योति, और जिला प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे। मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल), एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल), पुलिस विभाग, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग, एनसीसी, एनएसएस और सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स ने भाग लेकर वास्तविक आपातकालीन स्थिति में अपनी भूमिका का प्रदर्शन किया।

कैसे हुई मॉक ड्रिल की शुरुआत?

मॉक ड्रिल की शुरुआत एक काल्पनिक आपदा भूकंप के परिदृश्य से की गई, जिसमें बताया गया कि अस्पताल परिसर में अचानक झटका महसूस हुआ और कई लोग घायल हो गए। इस स्थिति में फौरन अलर्ट जारी किया गया और आपदा प्रबंधन की विभिन्न इकाइयों को सक्रिय कर दिया गया। सबसे पहले सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स ने स्थिति का प्राथमिक आंकलन किया और सूचना उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई। इसके तुरंत बाद फायर ब्रिगेड और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और घायलों को बाहर निकालने तथा प्राथमिक उपचार देने का कार्य शुरू किया।

Advertisement

उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने मॉक ड्रिल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य इंटर-एजेंसी समन्वय को बेहतर बनाना, आपदा प्रबंधन की मौजूदा योजनाओं की व्यवहारिकता को परखना और वास्तविक समय की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को सुदृढ़ करना है। यह अभ्यास हमें प्रशासन, आपातकालीन सेवाओं और समुदायिक हितधारकों के बीच एकीकृत दृष्टिकोण को लागू करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी मॉक ड्रिल के माध्यम से विभिन्न एजेंसियों को एक साथ काम करने का अभ्यास मिलता है, जिससे वास्तविक आपदा की स्थिति में किसी तरह की चूक की संभावना कम हो जाती है।

संसाधन अंतराल की पहचान

डॉ. वशिष्ठ ने यह भी बताया कि इस तरह के अभ्यास से यह पता चलता है कि हमारे पास कौन-कौन से संसाधन उपलब्ध हैं और किन क्षेत्रों में अभी सुधार की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूकंप, बाढ़ या आग जैसी आपदाओं की स्थिति में प्रतिक्रिया तंत्र कितना मजबूत है, इसका परीक्षण इस मॉक ड्रिल के जरिए हुआ।

मौके पर उपस्थित एनडीआरएफ की असिस्टेंट कमांडेंट सरोज ने कहा कि इस प्रकार के अभ्यास से फील्ड यूनिट्स को लाइव परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव प्राप्त होता है। साथ ही इससे स्थानीय प्रशासन और हमारे बीच बेहतर तालमेल विकसित होता है। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीमों को विशेष प्रशिक्षण प्राप्त है और ऐसी मॉक ड्रिल के जरिए उनकी क्षमताओं को जनहित में सही दिशा देने का कार्य होता है।