क्या हैं पूरा मामला?
मेरठ के स्वामीपाड़ा बुढ़ाना गेट निवासी कारोबारी अभिनव अग्रवाल और शास्त्रीनगर सेक्टर-6 के रहने वाले अमित अग्रवाल, जो आपस में अच्छे दोस्त थे, 28 जुलाई की सुबह पूजा सामग्री लेने वैगनआर कार से मथुरा जा रहे थे। रास्ते में कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (KGP) एक्सप्रेसवे पर छज्जूनगर टोल प्लाजा के पास उनकी कार का भयानक एक्सीडेंट हो गया।पुलिस के अनुसार, उनकी कार के आगे एक भारी ट्राला चल रहा था। अचानक ट्राले ड्राइवर ने ब्रेक लगाए और पीछे से तेज रफ्तार में आ रही वैगनआर उसमें घुस गई। हादसा इतना भयानक था कि दोनों कारोबारी मौके पर ही दम तोड़ बैठे।
रात 10 बजे हुआ था पोस्टमॉर्टम
हादसे के बाद दोनों के शव पलवल के सिविल अस्पताल लाए गए। रात करीब 10 बजे पोस्टमॉर्टम के बाद शवों को परिजनों को सौंप दिया गया। शवों को पहचान के लिए टैग लगाया गया था। परिवारों को विश्वास था कि अस्पताल प्रशासन द्वारा सही शव सौंपे गए हैं। दोनों शव अलग-अलग एम्बुलेंस में डालकर रात 11 बजे मेरठ के लिए रवाना कर दिए गए।
अंतिम दर्शन पर खुला राज
अगली सुबह, 29 जुलाई को जब अभिनव के घर पर अंतिम संस्कार की तैयारियां हो रही थीं, तो एक दोस्त ने अंतिम दर्शन की इच्छा जताई। जैसे ही चेहरे से कपड़ा हटाया गया, सभी हैरान रह गए वह शव अमित का था, अभिनव का नहीं। अभिनव के परिवार ने तुरंत अमित के घर फोन कर स्थिति स्पष्ट की। उधर से भी यही पुष्टि हुई कि शव बदल गए हैं। अब तक जिसे अमित समझा जा रहा था, वह दरअसल अभिनव था।
दोनों परिवारों में आपसी पहचान बनी राहत
सौभाग्य से दोनों परिवारों में आपसी जान-पहचान थी, जिससे बात बिगड़ने से पहले ही संभाली जा सकी। दोनों परिवारों ने आपस में एम्बुलेंस के जरिए शवों की अदला-बदली की और उसी दिन दोनों कारोबारियों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि शवों के टैग में गड़बड़ी की गई। अभिनव का टैग अमित को लगा दिया गया और अमित का टैग अभिनव को। इसी के अनुसार परिजन शव लेकर घर चले गए, क्योंकि चेहरा ढका हुआ था और अस्पताल प्रशासन पर भरोसा किया गया।
डॉक्टरों ने क्या कहा?