Inkhabar Haryana, Jind News: हरियाणा के जींद में दंपत्ति के घर में उस वक्त खुशी की लहर दौड़ पड़ी जब उनके घर पर शादी के 19 साल बाद बच्चे की किलकारी गुंजी। वर्षों की उम्मीद, संघर्ष और निराशा के बाद जब उनके घर बेटी ने जन्म लिया, तो यह केवल एक पारिवारिक खुशी नहीं रही, बल्कि पूरे इलाके का उत्सव बन गया।
बेटी का जन्म बना जीवन का सबसे बड़ा क्षण
संतान के लिए 19 साल से तरस रहे इस दंपति ने कई बार इलाज करवाया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। पत्नी कृष्णा को गर्भधारण के बाद बार-बार गर्भपात का दर्द झेलना पड़ा कुल 10 से अधिक बार। डॉक्टरों ने भी साफ कह दिया था कि रक्त समूह की समस्या के कारण वह बच्चा जन्म नहीं दे पाएंगी। समय बीतने के साथ उन्होंने उम्मीद छोड़ दी और पांच साल पहले सुरेंद्र ने अपने बड़े भाई के बेटे को गोद ले लिया।
एक साल पहले जब कृष्णा फिर से गर्भवती हुईं, तो परिवार ने सावधानी और उम्मीद के साथ समय बिताया। इस बार सब कुछ ठीक रहा और 19 साल 1 महीने बाद बेटी का जन्म हुआ। नार्मल डिलीवरी के बाद स्वस्थ बच्ची को देखकर पूरे परिवार की आंखें खुशी से भर आईं। बेटी का नाम भूमि रखा गया।
24 खाप प्रधान बने गवाह
बेटी के जन्म की खुशी को सुरेंद्र ने भव्य रूप देने का फैसला किया। उन्होंने न केवल अपने गांव बल्कि थुआ तपा के 21 गांवों का “चूल्हा न्यौता” दिया। 8 अगस्त को आयोजित इस कार्यक्रम में जिले की 24 खापों के प्रधान समेत 7 से 8 हजार लोग पहुंचे और भूमि को आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम में कुआं पूजन भी करवाया गया, जैसे बेटे के जन्म पर होता है।
खेतीबाड़ी से जुड़ी जिंदगी
सुरेंद्र खेतीबाड़ी करते हैं और 100 एकड़ से ज्यादा जमीन ठेके पर लेकर खेती करते हैं। वे कालीरमण खाप के उपप्रधान भी हैं। उनका मानना है कि बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं होता और बेटी का जन्म उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी है।