Inkhabar Haryana, Jind News: हरियाणा के जींद जिले के बड़नपुर गांव से जुड़े सैकड़ों मनरेगा मजदूरों ने मंगलवार को सरकार की कथित मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर जमकर प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत शहर के डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन से हुई, जहां भारी संख्या में एकत्रित हुए मजदूरों ने रैली के रूप में लघु सचिवालय स्थित एसडीएम कार्यालय तक मार्च किया।
संविधान और अधिकारों के नाम पर उठी आवाज
प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर “सरकार होश में आओ”, “मजदूरों का हक दिलाओ”, और “मनरेगा मजदूर एकता जिंदाबाद” जैसे नारे दर्ज थे। मजदूरों का गुस्सा केवल नारेबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सरकार की मौजूदा नीतियों पर सवाल उठाते हुए इसे जनविरोधी और मजदूर विरोधी करार दिया।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया 12 सूत्रीय मांग पत्र
रैली के अंत में प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम एसडीएम नरवाना, जगदीश चंद्र को 12 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इस मांग पत्र में मनरेगा मजदूरों को नियमित रोजगार देने, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने, मजदूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, तकनीकी अवरोधों को दूर करने, और निजीकरण की नीतियों पर पुनर्विचार करने जैसी मांगें प्रमुख रूप से शामिल थीं।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व गांव बड़नपुर के पूर्व सरपंच जोगिंद्र सिंह ने किया, जिन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि देशभर में निजीकरण और तकनीकीकरण के चलते मजदूरों को संगठित क्षेत्र से बाहर किया जा रहा है। रोजगार के अवसर घट रहे हैं, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मजदूरों का जीवन मुश्किल में पड़ गया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
मजदूरों की आवाज बनते जा रहे हैं छोटे गांव
बड़नपुर जैसे गांवों में मजदूरों की यह लामबंदी न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए चेतावनी है, बल्कि यह दर्शाता है कि ग्रामीण भारत में भी अब लोग अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। खास बात यह रही कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी भी देखने को मिली। एसडीएम जगदीश चंद्र ने मांग पत्र प्राप्त करते हुए कहा कि मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर जल्द से जल्द उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपनी आवाज उठाने की अपील की।