Inkhabar Haryana, Kaithal sanitation workers strike: हरियाणा के कैथल शहर इन दिनों भारी कूड़े और अव्यवस्था के संकट से जूझ रहा है। वजह है नगर परिषद के सफाई और कूड़ा उठान कर्मचारियों की हड़ताल, जिसने शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। हड़ताली कर्मचारियों ने साफ आरोप लगाए हैं कि नगर परिषद के अंतर्गत ठेके पर काम करवा रहे ठेकेदार न केवल उनका आर्थिक शोषण कर रहे हैं, बल्कि उनकी आवाज उठाने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी भी दी जाती है। मामला अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और अधिकारों के हनन का बन चुका है।
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ठेकेदारों के खिलाफ नाराजगी फूटी
शुक्रवार सुबह शहर के सफाई और कूड़ा उठान में लगे सैकड़ों कर्मचारी नगर परिषद कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। कूड़ा उठान वाले वाहन परिसर में खड़े कर दिए गए और कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर उन्हें ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे काम पर नहीं लौटेंगे।
कर्मचारियों का आरोप है कि कूड़ा उठान और सफाई कार्यों को ठेके पर सौंपने से भ्रष्टाचार और शोषण की जड़ें गहराई हैं। ठेकेदार उन्हें सरकार द्वारा तय पूरा वेतन नहीं देते, कई बार महीनों तक भुगतान रोक दिया जाता है और विरोध करने पर धमकाया जाता है।
स्टाफ की भारी कमी
हड़ताल पर गए कर्मचारियों ने यह भी खुलासा किया कि शहर की जनसंख्या के अनुपात में कम से कम 800 सफाईकर्मियों की जरूरत है, जबकि मौजूदा समय में 400 से भी कम कर्मचारी कार्यरत हैं। उनमें से भी बड़ी संख्या में कर्मचारी नेताओं, अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों के निजी आवासों पर ‘तैनात’ हैं। नतीजा यह है कि सार्वजनिक सफाई का बोझ गिने-चुने कर्मचारियों पर पड़ रहा है, जिससे वे अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव में काम करने को मजबूर हैं।
चेयरपर्सन पर लगे मिलीभगत के आरोप
कर्मचारियों ने नगर परिषद की भाजपा चेयरपर्सन पर ठेकेदारों से मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि परिषद का मौन रवैया और चेयरपर्सन की चुप्पी इस बात की ओर इशारा करती है कि ठेकेदारों की मनमानी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि आज तक न कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई, न ही उन्हें नियमित किया गया।
क्या हैं कर्मचारियों की मांगें?
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने साफ कहा है कि उन्हें सरकार द्वारा घोषित पूरा वेतन दिया जाए। सफाई कर्मचारियों की संख्या तात्कालिक रूप से बढ़ाई जाए। ठेकेदारों की मनमानी पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई हो। ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर कर्मचारियों की सीधी नियुक्ति की जाए।
नागरिकों में नाराजगी