Inkhabar Haryana, Kargil martyr Krishan Kumar: भारतीय सेना द्वारा कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देशभर में चलाए जा रहे ‘घर-घर शौर्य सम्मान’ अभियान के तहत सोमवार को सिरसा जिले के गांव तरकांवाली में शहीद सिपाही कृष्ण कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सेना के प्रतिनिधियों ने उनके परिजनों से भेंट कर न सिर्फ वीर शहीद की वीरता को याद किया, बल्कि परिवार को सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।
परिवार से की मुलाकात
सेना की ओर से हवलदार कमलेश बिश्रोई और सिपाही सुनील गांव तरकांवाली पहुंचे, जहां उन्होंने शहीद कृष्ण कुमार की पत्नी श्रीमती संतोष देवी और पुत्र मनोज व मुकेश से सौहार्दपूर्ण मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने परिजनों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और भरोसा दिलाया कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में शहीद परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि यह अभियान सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि उन अमर वीरों के त्याग और बलिदान को सम्मान देने की राष्ट्रीय भावना है।
कौन थे शहीद कृष्ण कुमार?
सिपाही कृष्ण कुमार भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 17वीं जाट रेजिमेंट का हिस्सा थे। वह कारगिल युद्ध के दौरान देश की रक्षा करते हुए 30 मई 1999 को मात्र 20 वर्ष की आयु में शहीद हो गए थे। उनके बड़े भाई बलजीत ने बताया कि शहीद कृष्ण कुमार युद्ध से महज कुछ दिन पहले, 25 दिनों की छुट्टी काटकर 25 मई 1999 को ही ड्यूटी पर लौटे थे। पांच दिन बाद ही उन्होंने कारगिल की जंग में दुश्मन से लोहा लेते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
शहीद परिवारों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही
सेना प्रतिनिधियों ने बताया कि ‘घर-घर शौर्य सम्मान’ कार्यक्रम के जरिए देश के कोने-कोने में बसे शहीद परिवारों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। यह पहल सिर्फ सम्मान देने की नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास और कर्तव्य का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत मां के उन सपूतों के परिवारों का ख्याल रखना हम सभी का नैतिक और राष्ट्रीय दायित्व है।
शहीदों की गाथाएं अमर रहेंगी
सेना अधिकारियों ने कहा कि कारगिल विजय दिवस (26 जुलाई) न केवल भारतीय सेना की जीत का पर्व है, बल्कि यह हर उस जवान को नमन करने का दिन है, जिसने देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। शहीद कृष्ण कुमार जैसे वीरों की गाथाएं सदियों तक प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।