




Karnal News: करनाल जिले में किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर सरकार की सख्ती के बावजूद पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से किसानों को जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जिले में अब तक 49 घटनाएं दर्ज की गई हैं। सात किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई है और 87500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से अब तक किसानों ने 57500 रुपये का भुगतान किया है।
रविवार को जिले में तीन नई घटनाएं सामने आईं, जिन पर अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया। पिछले साल के आंकड़ों की बात करें, तो करनाल में सबसे ज्यादा 38 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि कुरुक्षेत्र जिले में 37 घटनाएं सामने आई थीं। इस साल भी सबसे ज्यादा मामले करनाल के इंद्री तहसील में पाए गए हैं।
कृषि विभाग के तकनीकी अधिकारी डॉ. सुरेंद्र जांगड़ा का कहना है कि किसानों के पास पराली जलाने के बजाय अन्य विकल्प उपलब्ध हैं। किसान पराली को 1920 रुपये प्रति टन के हिसाब से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के खरीद केंद्र पर बेच सकते हैं। इसके अलावा, पराली को खेत में मशीनों द्वारा निष्पादन करने पर सरकार किसानों को प्रति एकड़ 1000 रुपये की अनुदान राशि भी दे रही है।
किसानों को इन विकल्पों का लाभ उठाकर आर्थिक फायदा मिल सकता है और पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है। पराली जलाने से न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी होगी। जिले में फसल अवशेष जलाने की रोकथाम के लिए विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगातार अपनी ड्यूटी पर तैनात हैं और घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
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