




चौबीसी खाप के प्रमुख प्रतिनिधि रामफल राठी ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि पिछले काफी समय से किसान अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, जिनमें सबसे प्रमुख मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और अन्य कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन है। राठी ने बताया कि 13 फरवरी से किसान खनौरी और शंभू बार्डर पर अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। इन आंदोलनों में हजारों किसान दिल्ली की ओर कूच करने की तैयारी कर रहे हैं। राठी ने यह भी कहा कि 6 दिसंबर को शंभू बार्डर से किसान अनुशासन में रहते हुए दिल्ली की ओर कूच करेंगे।
इससे पहले, खनौरी बार्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डलेवाल पिछले 8 दिनों से मरणासन्न पर बैठे हैं, जो किसानों की समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। खाप प्रतिनिधियों ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी कि अगर किसी भी तरह की ज्यादती की गई, तो हरियाणा की खापें किसानों के साथ मिलकर सड़क पर उतरेंगी।
बैठक के दौरान खापों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे समाज को बांटने वाली किसी भी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेंगे। खापों ने विशेष रूप से जाट लैंड बनाने की मांग करने वालों को चेतावनी दी और कहा कि इस तरह की गतिविधियां समाज में बंटवारा करने का काम करती हैं। खापों ने अपने पारंपरिक भाईचारे को बनाए रखने का संकल्प लिया और इस प्रकार की ओछी हरकतों को खारिज कर दिया।
साथ ही, खाप प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि जिन नेताओं ने पहले किसान आंदोलनों का समर्थन किया था, उनकी असलियत अब सामने आ चुकी है। विशेष रूप से टिकैत बंधु और यशपाल मलिक का नाम लिया गया, जिन पर भाजपा के एजेंट होने का आरोप लगाया गया। इन नेताओं का समर्थन अब किसानों के आंदोलन में शंका का कारण बन गया है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में कई प्रमुख खापों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें महम चौबीसी खाप के रामफल राठी, पूनिया खाप के शमशेर सिंह नंबरदार, दहिया खाप के जयपाल दहिया, 7 बास खाप के बलवान मलिक, कंडेला खाप के ओमप्रकाश कंडेला, सतरोल खाप के सतीश चेयरमैन, और अन्य प्रमुख खाप प्रतिनिधि शामिल थे। इन नेताओं ने किसानों के आंदोलन को समर्थन देने की बात दोहराई और सरकार को इस संबंध में सख्त चेतावनी दी।




