




कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में HPSC द्वारा आयोजित अधिकांश भर्तियों में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। यह स्थिति चिंताजनक है कि सरकार की कथित पारदर्शिता और ईमानदारी के बावजूद लगभग हर भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की भर्ती प्रक्रिया ईमानदार होती, तो अभ्यर्थियों को अदालत का दरवाजा खटखटाने की आवश्यकता नहीं होती।
कुमारी सैलजा ने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में PGT के 12 विषयों की भर्ती के खिलाफ हाईकोर्ट में 190 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें से पीजीटी मैथ की भर्ती पर 33, बायोलॉजी पर 31 और उर्दू पर सात याचिकाएं दर्ज की गई हैं। सरकार अब इन नियुक्तियों को पूरा करने की तैयारी कर रही है, लेकिन जब तक याचिकाओं का निपटारा नहीं होता, नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी पर असमंजस की स्थिति बनी रहेगी।
सैलजा ने विशेष रूप से वेटनरी सर्जन और आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर (एएमओ) की भर्तियों पर उठे सवालों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2023 में वेटनरी सर्जन की भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगे, जिसके बाद भर्तियों को रद्द करना पड़ा। इसी प्रकार, एएमओ की भर्ती परीक्षा में टॉपर्स को जानबूझकर फेल कर अपने चहेतों को नौकरी देने का आरोप लगाया गया है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। उन्होंने सरकार पर भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के कार्यकाल में शायद ही कोई भर्ती हो, जो विवादों से बची हो।
कुमारी सैलजा ने मांग की है कि हरियाणा सरकार HPSC की भर्तियों को लेकर श्वेत पत्र जारी करे। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता को यह बताना चाहिए कि आखिर क्यों हर भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं और क्यों हाईकोर्ट तक मामला पहुंच रहा है।




