Inkhabar Haryana, Kumari Selja: हरियाणा के सिरसा और फतेहाबाद जिले, जो कैंसर से सबसे अधिक प्रभावित हैं, वहां कैंसर रोगियों के उपचार और जांच के लिए समुचित सुविधाओं की कमी है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार से इन जिलों में विशेष चिकित्सा प्रबंध सुनिश्चित करने की मांग की है।
घग्गर नदी क्षेत्र में कैंसर का बढ़ता प्रभाव
कुमारी सैलजा ने बताया कि इन जिलों में कैंसर रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, विशेष रूप से घग्गर नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी को पत्र लिखकर जिला अस्पतालों में कैंसर रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
सैलजा ने कहा कि सिरसा और फतेहाबाद जैसे जिलों में कैंसर के मामलों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। अभी तक इन जिलों में कैंसर जांच के नमूने अन्य जिलों की प्रयोगशालाओं में भेजे जाते हैं। जिला मुख्यालयों पर जांच और उपचार की सुविधा नहीं होने से मरीजों को रोहतक, चंडीगढ़ और झज्जर के सरकारी संस्थानों या फिर निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। यह आम जनता के लिए बेहद खर्चीला और असुविधाजनक है।
हरियाणा में कैंसर की गंभीर स्थिति
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में हर महीने लगभग 1500 लोग कैंसर के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और आवश्यक सुविधाओं के अभाव के कारण मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान, झज्जर और पीजीआईएमएस रोहतक जैसे बड़े केंद्रों पर रोगियों की अत्यधिक संख्या के चलते इलाज में देरी हो रही है।
हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में राष्ट्रीय गैर संचारी रोग रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) लागू किया गया है। इसके तहत 30 वर्ष से अधिक आयु की जनसंख्या की स्क्रीनिंग की जा रही है। अब तक 62 लाख से अधिक व्यक्तियों की जांच की जा चुकी है। कुछ जिलों में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच के लिए कोलपोस्कोपी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
विशेष प्रबंध की मांग
सांसद सैलजा ने जोर देकर कहा कि सिरसा और फतेहाबाद जैसे जिलों में कैंसर रोगियों के उपचार के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाएं होनी चाहिए। जिला अस्पतालों में कैंसर रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति और जांच उपकरणों की व्यवस्था से मरीजों को राहत मिल सकती है।