Inkhabar Haryana, Kumari Selja: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार पर प्राइवेट बैंकों को ग्राहकों के आर्थिक शोषण की खुली छूट देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट बैंकों द्वारा विशेष रूप से मध्यम वर्ग के ग्राहकों का आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। कुमारी सैलजा ने मांग की है कि सरकार जनहित में ठोस कदम उठाकर इस लूट पर अंकुश लगाए।
मध्यम वर्ग पर सबसे अधिक बोझ
मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि जब किसी मध्यमवर्गीय व्यक्ति को पैसों की आवश्यकता होती है, तो वह सबसे पहले पर्सनल लोन लेने की सोचता है। हालांकि, पर्सनल लोन लेने के बाद उसे ब्याज के अतिरिक्त कई अन्य शुल्कों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा पर्सनल लोन पर एक निश्चित ब्याज दर के साथ-साथ प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी, और अन्य छिपे हुए चार्ज लगाए जाते हैं, जिनकी जानकारी पहले से ग्राहकों को नहीं दी जाती।
लोन से जुड़े अनावश्यक चार्ज
कुमारी सैलजा ने बताया कि पर्सनल लोन पर 5 प्रतिशत प्रोसेसिंग फीस और 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है। यह शुल्क नॉन-रिफंडेबल होता है, भले ही लोन कैंसिल कर दिया जाए। इतना ही नहीं, यदि ग्राहक लॉक-इन पीरियड से पहले लोन का भुगतान करता है, तो उसे बकाया राशि पर 5 प्रतिशत प्री-पेमेंट चार्ज और 18 प्रतिशत जीएसटी चुकाना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोन अप्रूव या डिस्बर्सल होने के बाद ग्राहक इसे कैंसिल करता है, तो बैंक तीन हजार रुपये के साथ 18 प्रतिशत जीएसटी चार्ज के रूप में वसूलते हैं। लोन की री-पेमेंट के दौरान स्वैपिंग कराने पर भी 500 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी चार्ज लिया जाता है।
डुप्लीकेट डॉक्यूमेंट और अन्य चार्जेस पर सवाल
कुमारी सैलजा ने बताया कि पर्सनल लोन के डुप्लीकेट डॉक्युमेंट्स, एनओसी या क्रेडिट स्टेटमेंट के लिए भी बैंक ग्राहकों से 50 रुपये से 500 रुपये तक वसूलते हैं, जिस पर जीएसटी अलग से लगता है। यह चार्ज एजुकेशन लोन जैसे अन्य लोन पर भी लागू होता है।
जनहित में कदम उठाने की मांग
कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र सरकार को बैंकों के हित से पहले मध्यम वर्ग के हितों के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह वर्ग सबसे ज्यादा शोषित और पीड़ित है। सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे ग्राहकों को राहत मिले और बैंकों द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण पर रोक लगाई जा सके।