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Kumari Sheilja News: “चंडीगढ़ में हरियाणा का हिस्सा…”, भुमि विवाद पर सैलजा ने जताई चिंता

BY: • LAST UPDATED : November 17, 2024

Inkhabar Haryana, Kumari Sheilja News: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने चंडीगढ़ और हरियाणा के बीच भूमि विवाद पर अपनी चिंताओं का इज़हार किया। उन्होंने कहा कि अगर हरियाणा मौजूदा विधानसभा भवन पर अपनी दावेदारी छोड़ता है और किसी नए स्थान पर विधानसभा भवन बनाने की प्रक्रिया शुरू करता है, तो इससे चंडीगढ़ पर हरियाणा की दावेदारी कमजोर हो सकती है।

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60-40 के अनुपात में चंडीगढ़ का हिस्सा

कुमारी सैलजा ने कहा कि चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा का 60-40 के अनुपात में हिस्सा है और इस संदर्भ में हरियाणा को अपनी हिस्सेदारी का पालन करते हुए भूमि के बदले भूमि देने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि हरियाणा को अपने हिस्से में नई विधानसभा भवन बनाने का अवसर है, तो इसे उचित तरीके से किया जाना चाहिए, बिना किसी और राज्य से अतिरिक्त भूमि लेने की आवश्यकता के।

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पंजाब द्वारा हरियाणा के साथ अन्याय

कुमारी सैलजा ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब लंबे समय से हरियाणा के लोगों के साथ अन्याय कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से सतलुज यमुना लिंक (SYL) नहर के पानी का मुद्दा उठाया, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पंजाब सरकार हरियाणा को पानी नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा कई सालों से लटका हुआ है और इससे हरियाणा के किसानों और जनसंख्या को बहुत नुकसान हो रहा है।

हिंदी भाषी क्षेत्र लौटाने पर विचार

इसके साथ ही कुमारी सैलजा ने यह भी सुझाव दिया कि पंजाब को हरियाणा के हिंदी भाषी क्षेत्रों को लौटाने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक आवश्यकता है, जो हरियाणा के सामाजिक और सांस्कृतिक हितों को सुदृढ़ करेगी।

पंचकूला में प्रस्तावित भूमि और केंद्र की मंजूरी

हाल ही में हरियाणा सरकार द्वारा प्रस्तावित भूमि को लेकर कुमारी सैलजा ने कहा कि चंडीगढ़ में रेलवे स्टेशन से आइटी पार्क की ओर जाने वाली सड़क के पास 10 एकड़ भूमि हरियाणा को दी जा रही है। इसके बदले में हरियाणा सरकार चंडीगढ़ को पंचकूला के मनसा देवी कॉम्पलेक्स के पास 12 एकड़ भूमि देने का प्रस्ताव रख रही है। हालांकि, कुमारी सैलजा ने इस कदम को अत्यधिक महत्व नहीं दिया और कहा कि हरियाणा के लिए अपने हिस्से की भूमि पर नई विधानसभा भवन बनाने का विकल्प पहले से उपलब्ध है, और इसे सटीक तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

 

विधानसभा भवन का विस्तार भी एक विकल्प

कुमारी सैलजा ने यह भी कहा कि मौजूदा विधानसभा भवन का विस्तार भी एक संभावित विकल्प हो सकता है। यदि हरियाणा सरकार मौजूदा विधानसभा भवन पर अपनी दावेदारी छोड़ देती है, तो यह भविष्य में अन्य सरकारी भवनों पर भी दावेदारी की समस्याओं को जन्म दे सकता है, जैसे कि हरियाणा को अपना सचिवालय खाली करने के लिए कह दिया जाए।

 

सैलजा ने अंत में कहा कि हरियाणा सरकार को अपने हितों की रक्षा के लिए मजबूत और सोच-समझकर कदम उठाने चाहिए। उन्होंने सभी दलों से अनुरोध किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केवल हरियाणा के विकास और हितों को प्राथमिकता दें।

 

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