




सांसद सैलजा ने अपने बयान में कहा कि किसान लंबे समय से एमएसपी की गारंटी का कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। खनौरी बॉर्डर पर महीनों से धरने पर बैठे किसान सरकार की उदासीनता से निराश हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर खाद और उर्वरक भी नहीं मिल रहे, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ रही हैं।
उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह वही सरकार है, जिसने पहले किसानों के खिलाफ तीन विवादास्पद कृषि कानून बनाए। इन कानूनों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के बाद इन्हें वापस लेना पड़ा। अब एमएसपी की गारंटी के लिए किसानों का संघर्ष जारी है, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही।
बता दें कि, 6 दिसंबर को किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान पर सरकार की प्रतिक्रिया को कुमारी सैलजा ने आलोचना का विषय बनाया। उन्होंने कहा कि यदि किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जाना चाहते हैं, तो उन्हें रोका क्यों जा रहा है? यह उनकी लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
सैलजा ने किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की भूख हड़ताल का भी ज़िक्र किया, जो पिछले 8 दिनों से जारी है। उन्होंने कहा कि डल्लेवाल का स्वास्थ्य गिर रहा है, लेकिन सरकार या प्रशासन का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने तक नहीं गया। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह तुरंत किसान नेताओं से बात करे और उनकी भूख हड़ताल समाप्त करवाए।
सैलजा ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन किसी भी लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है। किसानों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन उनका अधिकार है और इसे रोकने या कुचलने का प्रयास निंदनीय है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया ऐसा है, मानो वह किसानों को प्रताड़ित करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती।
कुमारी सैलजा ने सरकार से किसानों की समस्याओं को तत्काल हल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी की बात सुनी जानी चाहिए। एमएसपी की गारंटी को लेकर किसानों की मांग जायज़ है, और सरकार को इसे लेकर सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।




