




Inkhabar Haryana, Landslide in Panchkula: हर साल की तरह इस बार भी मानसून की दस्तक ने उत्तर भारत में अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में मानसून के सक्रिय होते ही भारी बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
हिमाचल प्रदेश में हो रही लगातार बारिश का असर हरियाणा के मैदानी इलाकों पर भी साफ नजर आने लगा है। बारिश का पानी कोटी नदी में आने से उसका जलस्तर काफी बढ़ गया है। वहीं, यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज पर बुधवार सुबह 6 बजे इस मानसून सीजन का अब तक का सर्वाधिक 73,749 क्यूसेक पानी रिकॉर्ड किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह जलप्रवाह चेतावनी स्तर के काफी करीब है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पंचकूला जिले के पहाड़ी क्षेत्र मोरनी हिल्स में भारी बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। रायपुर रानी से मोरनी को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग भूस्खलन के चलते बाधित हो गया है। पहाड़ियों से लगातार मलबा और पत्थर गिरने के कारण सड़कें पूरी तरह बंद हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भूस्खलन के कारण सड़कों पर भारी मात्रा में मिट्टी और पत्थर जमा हो गए हैं, जिससे न सिर्फ वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है, बल्कि पैदल चलना भी जानलेवा साबित हो रहा है।
हालांकि स्थिति गंभीर होने के बावजूद प्रशासन की ओर से अभी तक कोई भारी मशीनरी मौके पर नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में स्थानीय ग्रामीणों ने खुद फावड़े और तसले लेकर मलबा हटाने की कोशिश शुरू कर दी है। लेकिन बिना संसाधनों और मशीनरी के यह कार्य जोखिम भरा और सीमित है। मोरनी से बड़ी शेर को जोड़ने वाला मार्ग भी भूस्खलन की चपेट में आ चुका है। लगातार बारिश से जमीन खिसकने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे गांवों के जिला मुख्यालय से संपर्क टूटने का खतरा बढ़ गया है।




