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Love story in Rewari: सच्चे प्रेम की मिसाल बना ये बुजुर्ग दंपति, 70 साल साथ निभाया, पत्नी के जाने के बाद पति ने भी कहा दुनिया को अलविदा

BY: • LAST UPDATED : July 31, 2025
Inkhabar Haryana, Love story in Rewari: हरियाणा के रेवाड़ी जिले के पीथनवास गांव में बुधवार को घटी एक मार्मिक घटना ने पूरे गांव को भावुक कर दिया। 93 वर्षीय दलीप सिंह और उनकी 90 वर्षीय पत्नी सुरजी देवी की मृत्यु महज आधे घंटे के अंतराल में हो गई। उनका जीवन भर का साथ, उनका प्रेम और उनकी एक साथ विदाई – सब कुछ इतना अलौकिक था कि अब यह गांव ही नहीं, पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

सात दशक का साथ

दलीप सिंह और सुरजी देवी का विवाह 70 वर्ष से भी अधिक समय तक चला। यह एक ऐसा रिश्ता था, जिसमें कोई मनमुटाव या कड़वाहट नहीं थी। उनके बेटे फूल सिंह बताते हैं, “मैंने अपने माता-पिता को कभी एक-दूसरे से ऊंची आवाज़ में बात करते नहीं सुना। उनका रिश्ता बेहद स्नेहिल और शांत था।” यह दंपति चार पीढ़ियों तक परिवार के साथ खुशी से जीवन व्यतीत करता रहा। उनके तीन पौत्र और चार पड़पौत्र हैं।

बुधवार सुबह की शुरुआत

बुधवार की सुबह भी बाकी दिनों जैसी ही सामान्य थी। फूल सिंह की पत्नी रोज की तरह चाय लेकर अपने सास-ससुर के कमरे में पहुंची। लेकिन उस दिन कुछ अलग था। सुरजी देवी ने पहली बार चाय पीने से मना कर दिया, जबकि दलीप सिंह हमेशा की तरह चाय का कप लेकर बाहर कुर्सी पर बैठ गए।

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कुछ देर बाद जब बहू दोबारा कमरे में गई, तो सुरजी देवी को चारपाई पर निढाल पाया। बार-बार आवाज़ देने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। शरीर छूने पर वह ठंडी लग रही थीं। परिवार ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया, जिन्होंने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

जीवन साथी के वियोग में चुपचाप विदा हो गए दलीप सिंह

जब दलीप सिंह को उनकी पत्नी के निधन की खबर दी गई, तो वे कुर्सी पर चुपचाप बैठे रह गए। उनके चेहरे पर गहरी पीड़ा साफ नजर आ रही थी, लेकिन उन्होंने कोई शब्द नहीं कहा। कुछ ही मिनटों में जब परिवार ने उन्हें देखा, तो वे भी इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। दोनों के बीच का प्रेम इतना गहरा था कि एक के बिना दूसरा जीवित नहीं रह सका।

गांव में छाई शोक की लहर

दंपति की मृत्यु की खबर पूरे गांव में फैल गई। लोग स्तब्ध रह गए। फूल सिंह बताते हैं कि मैंने जैसे ही मां की मृत्यु की खबर अपनी बहनों को दी, कुछ ही देर में पिता के जाने की सूचना भी देनी पड़ी। यह हमारे लिए असहनीय क्षण था।

गांव के बुजुर्गों ने भी कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतना गहरा प्रेम और ऐसा अंत पहले कभी नहीं देखा। लोग उनकी जोड़ी को राम-सीता, शिव-पार्वती की तरह याद कर रहे हैं।