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Mahira Homes Project: माहिरा होम्स प्रोजेक्ट के खरीदारों ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की लगाई गुहार, जानें वजह

BY: • LAST UPDATED : November 23, 2024
Inkhabar Haryana, Mahira Homes Project: हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित माहिरा होम्स के खरीदारों की स्थिति इन दिनों अत्यंत दयनीय हो चुकी है। अफोर्डेबल होम्स के तहत सेक्टर 68 में स्थित माहिरा-68 प्रोजेक्ट के 1497 खरीदारों ने अब राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की है। यह मामला तब सामने आया, जब खरीदारों ने कई बार हरियाणा सरकार, भारत सरकार, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग और RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) से शिकायत की, लेकिन अब तक उन्हें अपने सपनों का घर नहीं मिला।

प्रोजेक्ट का शुभारंभ अप्रैल 2018 में हुआ

माहिरा-68 प्रोजेक्ट का शुभारंभ अप्रैल 2018 में हुआ था और इसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम में शामिल किया गया था। इस योजना के तहत करीब 1497 फ्लैट्स को बुक किया गया था, और खरीदारों को अगस्त 2022 तक फ्लैट्स मिलने थे। एक फ्लैट की क़ीमत लगभग 24 लाख रुपए निर्धारित थी, जो गरीब और मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ा सपना था।

हालांकि, इस प्रोजेक्ट के रास्ते में कई अड़चनें आईं। मई 2022 में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने माहिरा होम्स का लाइसेंस रद्द कर दिया, जब यह पता चला कि माहिरा द्वारा बैंक गारंटी में फ़र्ज़ी दस्तावेज पेश किए गए थे। इसके बाद अगस्त 2022 में माहिरा के खातों को फ्रीज़ कर दिया गया और जनवरी 2023 से इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद हो गया।

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कई खरीदारों के लाखों फंसे

माहिरा होम्स ने अब तक 360 करोड़ रुपये जमा किए हैं, लेकिन खरीदारों को उनके घर नहीं मिल सके। इससे कई परिवारों की उम्मीदों को गहरी चोट पहुंची है और अब वे विभिन्न सरकारी विभागों और अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। वहीं माहिरा के खिलाफ विभिन्न कानूनी कार्यवाही भी चल रही है। इसके प्रमोटर सिकंदर छोकर को अप्रैल 2024 से जेल भेजा गया है, जबकि धर्म सिंह छोकर के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी का आदेश दिया है।

इसके अलावा, माहिरा के नाम से सेक्टर 103, 104, 63, और 95 में अन्य प्रोजेक्ट्स भी चल रहे हैं, जिनमें करीब 5000 खरीदार फंसे हुए हैं। इन खरीदारों की स्थिति और भी जटिल है, क्योंकि उन्हें न तो अपने फ्लैट्स मिल पा रहे हैं, और न ही उनकी रक़म का कोई ठोस समाधान निकल रहा है।

न्याय की उम्मीद

माहिरा के खरीदारों का कहना है कि वे अब तक हर स्तर पर शिकायतें दर्ज कर चुके हैं, लेकिन किसी भी विभाग से उचित और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। अब इन लोगों ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है, क्योंकि वे अपने भविष्य को लेकर बेहद निराश और हताश हो चुके हैं।

सरकारी योजनाओं के तहत गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए घर उपलब्ध कराने का वादा किया जाता है, लेकिन अगर इस तरह के प्रोजेक्ट्स में धोखाधड़ी और अधिकारियों की लापरवाही होती है, तो यह उन लोगों के लिए एक बड़ा धक्का बन जाता है, जो इन घरों को पाने के लिए सालों से मेहनत कर रहे हैं।