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Manoharlal Khattar: अमेरिका से डिपोर्ट हुए भारतीयों पर बोले केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, “डोंकी रूट खतरनाक खेल, इसमें नहीं फंसना चाहिए”

BY: • LAST UPDATED : February 27, 2025
Inkhabar Haryana, Manoharlal Khattar: हाल ही में अमेरिका से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया, जिनमें कई लोगों को हथकड़ियां लगाकर वापस भेजा गया। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अवैध रूप से विदेश जाने का खेल बेहद खतरनाक है और इसे रोकना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि डोंकी रूट (अवैध तरीके से देश छोड़ना) का खेल बहुत खतरनाक है, और इसमें फंसने वालों की वापसी निश्चित नहीं होती।

हर देश का कानून- खट्टर

मनोहर लाल ने कहा कि हर देश के अपने कानून होते हैं और अमेरिका जैसे देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अवैध प्रवासियों को स्वीकार नहीं करेंगे। अमेरिका की सरकार ने जो भी अवैध नागरिक थे, उन्हें वापस भेज दिया है। हम इसमें ज्यादा बहस नहीं कर सकते, क्योंकि वहां का कानून इस पर काम कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो भारतीय अवैध रूप से विदेश जा रहे हैं, वे वहां अपराधी माने जाते हैं। वे उस देश के अपराधी हैं, क्योंकि उन्होंने वहां के कानून का उल्लंघन किया है। हमारे देश के लोगों ने गलत रास्ता अपनाया और हमने पहले भी उन्हें समझाया कि ऐसा न करें। आज भी मैं यही कहूंगा कि डोंकी रूट को अपनाना एक गंभीर समस्या है और इसे रोकना होगा।

नशे की तरह अवैध प्रवास भी एक समस्या

मंत्री ने अवैध प्रवास की तुलना नशे की समस्या से करते हुए कहा कि जिस तरह लोग नशे की दलदल में फंस जाते हैं, उसी तरह वे अवैध रूप से विदेश जाने के लिए खतरनाक रास्ते अपनाते हैं। उन्होंने कहा,
“जिस तरह नशा एक समस्या है, उसी तरह डिपोर्ट होना भी एक समस्या बन चुकी है। हमें इससे बाहर निकलना होगा और इसे रोकने के उपाय करने होंगे।”

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‘हम सहानुभूति क्यों दिखाएं?’- खट्टर

अमेरिका से हथकड़ियां लगाकर डिपोर्ट किए गए भारतीयों पर सहानुभूति जताने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि हमें बिना वजह सहानुभूति दिखाने की जरूरत नहीं है। आज हम उनके लिए सहानुभूति क्यों दिखाएं? वे जिस तरह वहां पहुंचे थे, वैसे ही उन्हें वापस भेज दिया गया। मनोहर लाल ने यह भी कहा कि भारत सरकार की प्राथमिकता देश के भीतर रोजगार के अवसर बढ़ाना है, ताकि लोग विदेश जाने की बजाय यहीं अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें। आज अगर हम उन्हें रोजगार दे सकते हैं, तो हमें यही करना चाहिए, बजाय इसके कि हम अवैध प्रवासियों के लिए सहानुभूति जताएं।