




हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने निर्णय लिया है कि अब प्रदेश के सभी नशामुक्ति केंद्रों में मोबाइल की लत से पीड़ित बच्चों का भी इलाज किया जाएगा। इसके लिए राज्यभर के जिला अस्पतालों में चल रहे नशामुक्ति केंद्रों में विशेष वार्ड बनाए जाएंगे। इन वार्डों में बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य जांच, काउंसलिंग और उपचार का प्रबंध किया जाएगा।
हरियाणा में मानसिक स्वास्थ्य निदेशक डॉ. ब्रह्मजीत संधू के अनुसार, कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई ने बच्चों को मोबाइल की आदत डलवा दी। महामारी खत्म होने के बाद भी बच्चे इस आदत से उबर नहीं पाए हैं। मोबाइल की लत ने बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को बाधित किया है, जिससे माता-पिता और शिक्षकों के लिए यह एक गंभीर चुनौती बन गई है।
हरियाणा सरकार ने इन बच्चों के इलाज के लिए मनोरोग विशेषज्ञों और काउंसलरों की टीम तैयार करने का निर्णय लिया है। इन विशेषज्ञों का कार्य बच्चों की आदतों को समझकर उन्हें मोबाइल की लत से दूर करना होगा। इसके अलावा, किशोर स्वास्थ्य केंद्रों को ऐसे बच्चों की पहचान करने और उनकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को देने की जिम्मेदारी दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग का यह कदम सराहनीय है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान परिवार और समाज की भूमिका के बिना संभव नहीं है। बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए परिवार के सदस्यों को उनके साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखने की जरूरत है।




