Inkhabar Haryana, Nuh Waqf Board land dispute: हरियाणा के नूंह जिले के मालब गांव में वक्फ बोर्ड और स्थानीय ग्रामीणों के बीच जमीन को लेकर विवाद तेजी से गहराता जा रहा है। मामला एक ऐसी कब्रिस्तान की जमीन से जुड़ा है जिसे ग्रामीण पंचायती और मजहबी आस्था से जुड़ा मानते हैं, जबकि वक्फ बोर्ड ने इसे अपनी घोषित संपत्ति बताते हुए लीज पर दे दिया है। यह घटनाक्रम न सिर्फ कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ रहा है, बल्कि मुस्लिम समाज के भीतर वक्फ बोर्ड की भूमिका और कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या हैं पूरा मामला?
मालब गांव के इस कब्रिस्तान में स्थानीय मुस्लिम समुदाय वर्षों से अपने बुजुर्गों को दफन करता आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन पंचायती है और गांव की सामूहिक धार्मिक भावना से जुड़ी हुई है। लेकिन हाल ही में वक्फ बोर्ड ने इस जमीन पर दावा ठोकते हुए इसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया और लीज पर देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी।
जैसे ही यह जानकारी गांव वालों को मिली, विरोध की आवाजें तेज हो गईं। लोगों ने इसे “तानाशाही” करार देते हुए जमीन पर किसी भी निर्माण कार्य को सख्ती से रोकने का ऐलान किया। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा तक एक सुर में बोले कि इस जमीन पर किसी भी कीमत पर कब्जा नहीं होने देंगे।
ग्रामीणों ने जताई आपत्ति
ग्रामीणों ने बताया कि इस कब्रिस्तान में उनके सैकड़ों बुजुर्ग दफन हैं। लीज पर देने के बाद अगर यहां कोई निर्माण कार्य होता है, तो यह सीधा-सीधा मजहबी अपमान होगा। “हम किसी कीमत पर अपने बुजुर्गों की कब्रों पर इमारतें बनने नहीं देंगे। जरूरत पड़ी तो हम मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुंचाएंगे,” एक ग्रामीण ने कहा।
वक्फ संशोधन कानून और आंतरिक विरोध
इस विवाद के बीच एक और बात सामने आई है कि वक्फ बोर्ड के प्रति बढ़ता असंतोष अब मुस्लिम समाज के भीतर से भी उभर रहा है। वक्फ संशोधन कानून को लेकर जहां कुछ वर्ग विरोध कर रहे हैं, वहीं कई लोग इसे समय की मांग बता रहे हैं। वजह है वक्फ बोर्ड की कथित मनमानी, अपारदर्शिता और राजनीतिक संरक्षण के चलते स्थानीय संपत्तियों पर हस्तक्षेप। यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो वक्फ बोर्ड को बेकाबू बना चुकी है। कई गांवों में वक्फ बोर्ड द्वारा की गई गतिविधियों से न सिर्फ गैर-मुस्लिम परेशान हुए हैं, बल्कि खुद मुस्लिम भी इससे आहत हैं।