Inkhabar Haryana, Play-way school operator statement on Manisha Case: हरियाणा के भिवानी जिले में 19 वर्षीय लेडी टीचर मनीषा की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में है। 11 अगस्त को लापता हुई मनीषा की लाश 13 अगस्त को खेतों में मिली थी। अब किड्स केयर सीएससी बाल विद्यालय के संचालक रोहित दहिया ने मनीषा के स्कूल जीवन, उसके सपनों और अंतिम दिन की घटनाओं पर चुप्पी तोड़ी है।
पढ़ाई के लिए चुना शिक्षक का पेशा
मनीषा ने इस साल 12वीं साइंस स्ट्रीम से 85% अंक हासिल किए थे। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन उसका सपना बड़ा—B.Sc. नर्सिंग कर नर्सिंग ऑफिसर बनने का था। फीस का इंतजाम करने के लिए उसने जुलाई में एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी जॉइन की।
3 जुलाई को उसने जॉब के लिए संपर्क किया, 4 जुलाई को इंटरव्यू दिया और 9 जुलाई से पढ़ाना शुरू कर दिया। बच्चों को पढ़ाने में उसकी रुचि और अच्छे स्वभाव के चलते स्कूल प्रबंधन ने उसे तुरंत मौका दिया। उसे 5 हजार रुपये मासिक वेतन तय किया गया था और इसी बीच उसे अपनी पहली सैलरी मिलने वाली थी।
सीधी-सादी और काम से काम रखने वाली लड़की
संचालक रोहित दहिया बताते हैं कि मनीषा का स्वभाव बेहद शांत था। वह कम बोलती थी और केवल अपने काम से काम रखती थी। क्लासरूम में बच्चों को अच्छे से समझाने का प्रयास करती और मैनेजमेंट द्वारा दिए गए हर काम को जिम्मेदारी से निभाती।
गांव ढाणी लक्ष्मण से स्कूल तक सीधी बस न मिलने के कारण शुरुआत में उसे आने-जाने में दिक्कत होती थी। बाद में प्रबंधन ने उसकी सुविधा के लिए आइडियल संस्थान की बस से आने-जाने की व्यवस्था कर दी। हालांकि, 11 अगस्त को उसने उस बस का इस्तेमाल नहीं किया।
क्या हुआ था 11 अगस्त के दिन?
सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, 11 अगस्त को मनीषा दोपहर 1:58 बजे स्कूल गेट से बाहर निकली। उसने स्टाफ से घर जाने की बात कही और नर्सिंग कॉलेज की दिशा में जाती नजर आई। स्कूल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित नर्सिंग कॉलेज ही वह जगह थी, जहां से मनीषा अपनी बस पकड़ती थी। रास्ते में लगे कुछ दुकानों के कैमरों में भी वह अकेली जाती दिखी।
शाम को बस चालक ने फोन कर बताया कि मनीषा घर नहीं पहुंची। इसके बाद मनीषा के पिता संजय से संपर्क हुआ। वह उस समय लोहारू में थे। घर वालों ने भी पुष्टि की कि मनीषा घर नहीं लौटी। इसके बाद परिवार स्कूल पहुंचा और सीसीटीवी देखा गया, जिसमें मनीषा आखिरी बार स्कूल गेट से बाहर निकलती दिखी। दो दिन बाद उसकी लाश खेतों से बरामद हुई।
पहली सैलरी से करना चाहती थी ये काम
मनीषा ने स्कूल की नौकरी सिर्फ इसलिए जॉइन की थी ताकि अपनी आगे की पढ़ाई की फीस जुटा सके। लेकिन पहली सैलरी मिलने से पहले ही उसकी जिंदगी की डोर टूट गई। एक सीधी-सादी, सपनों से भरी लड़की का यह दर्दनाक अंत आज भी कई सवाल खड़े कर रहा है।